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पुणे के मुल्लन में फिर दो बार दोषी को बरी किया गया, न्याय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न

पुणे के मुल्लन उपनगर में 65 वर्षीय एक व्यक्ति पर बाल यौन अपराध और हत्या का आरोप लगा है। स्थानीय पुलिस ने इस दुष्कर्म की गवाही को साक्षी व विभिन्न फोरेंसिक रिपोर्टों के आधार पर दर्ज किया। तथापि, वही आरोपी दो पूर्व यौन अपराध मामलों में पहले ही न्यायालय से बरी हो चुका था। इस दोहरावदार बरी होने की स्थिति ने न्यायिक प्रणाली की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

पुर्व मामलों में, अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त सबूतों के अभाव या प्रक्रिया संबंधी चूकों को लेकर अपील की थी, जिससे उच्च न्यायालय ने बरी करने का आदेश दिया। अब, इस ही आरोपी पर फिर एक और गंभीर अपराध में संदिग्धता लगा दी गई है, जो यह संकेत देता है कि न्यायिक प्रक्रिया में पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक प्रतिबंधात्मक उपाय अभी भी लागू नहीं हुए हैं।

पु्लिस ने मामले की तुरंत जांच शुरू की, लेकिन रिपोर्टों में बताया गया है कि प्रारंभिक ग्राउंड सुरक्षा और साक्षी संरक्षण में कमी रही। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत सुरक्षा कवच को बढ़ाया, फिर भी समुदाय में भय और असंतोष का माहौल बना हुआ है। कई नागरिकों ने कहा, "जैसे ही एक नई पीढ़ी का दर्द उजागर हुआ, वही पुराने केसों की फाइलें धूल झाड़ रही थीं,"—यह व्यंग्यात्मक टिप्पणी न्याय व्यवस्था की अचलता को दर्शाती है।

शहरी विकास और सार्वजनिक सेवाओं की प्रशंसा के बीच, इस प्रकार के अपराधों की पुनरावृत्ति स्थानीय प्रशासन के प्रोटोकॉल में खाई को उजागर करती है। अभियोग का पुनरावलोकन, प्रभावी पीड़ित सहायता तंत्र, तथा संभावित पुनरावृत्ति रोकथाम के लिये सुधारात्मक कदमों की मांग अब प्रमुख एजेंडा बन गई है।

न्यायिक समीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, पुलिस के केस फाइलिंग और फॉलो‑अप में सुधार लाने, तथा पूर्व बरी मामलों की पुनः जाँच को अनिवार्य करने की सिफारिशें विशेषज्ञों और नागरिक समाज समूहों द्वारा की जा रही हैं। अंततः, यदि इस मामले में उचित न्याय नहीं मिला, तो यह न केवल पीड़ित के परिवार के लिये बल्कि पूरे समाज के लिये एक अभूतपूर्व चेतावनी बन जाएगी—कि सुरक्षा व न्याय दोनों ही प्रणालीगत रूप से सुदृढ़ नहीं हुए तो कोई भी सुधार अस्थायी रहेगा।

Published: May 4, 2026