विज्ञापन
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?
आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें।
पंजाब में 2024 में नशे की अधिकतम मौतें, लेकिन केसों की संख्या फिर भी सबसे अधिक
राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब ने 2024 में 106 नशे के ओवरडोज़ मौतें दर्ज कीं। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में बढ़ा है और राज्य को देश में दूसरी बड़ी मृत्यु दर वाले स्थान पर रखता है। हालांकि अब यह शीर्ष पर नहीं है, लेकिन नशा नियंत्रण के संदर्भ में एक और आँकड़ा चिंता का कारण बनता है—एएनडीपीएस अधिनियम के तहत ट्रैफ़िकिंग हेतु पदार्थों की कब्ज़ा संबंधित मामलों की संख्या इस राज्य में सबसे अधिक रही।
राज्य प्रशासन ने इस वृद्धि को ‘वाबस्ता’ (स्वाभाविक) कहा, जबकि पुलिस ने बताया कि नई जाँच प्रक्रिया और सुदृढ़ निगरानी ने कई छिपे केस सामने लाए हैं। यहाँ तक कि 'सफलता' के नाम पर अधिक केसों की रिपोर्ट को एक प्रकार की बर्बाद प्रशंसा माना जा सकता है—जैसे हर साल नई रिपोर्टें, लेकिन समाधान रुकता नहीं।
सिविल समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि लगातार बढ़ती मृत्यु संख्या और साथ ही ट्रैफ़िकिंग केसों की बाढ़, राज्य की नशा-रोकथाम नीति की चुनौतियों को उजागर करती है। पुनर्वास केंद्रों की कमी, उपचार में लंबी प्रतीक्षा अवधि, और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियानों का प्रभावी न होना, इस समस्या के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। नागरिकों की रोज़मर्रा की सुरक्षा पर भी असर स्पष्ट है; कई परिवारों ने बताया कि नशे के आदी लोगों की मौत से न सिर्फ भावनात्मक बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है।
प्रशासनिक स्तर पर, पंजाब सरकार ने विशेष आयुक्तों को नशा नियंत्रण अभियान में जोड़ने, अधिक फील्ड ऑपरेशनों को तेज करने, और डिटॉक्स फसिलिटीज़ के विस्तार की घोषणा की है। परन्तु आलोचक तर्क देते हैं कि केवल आदेश देना और केसों की संख्या बढ़ाना समाधान नहीं, बल्कि वास्तविक उपचार और रोकथाम पर निवेश आवश्यक है।
संक्षेप में, 2024 की आँकड़ें यह दर्शाते हैं कि पंजाब में नशे से जुड़ी मृत्युदर में सुधार की आवश्यकता अभी भी बड़ी है, जबकि कानूनी कार्रवाई में तोड़-फोड़ के बाद भी पुनरावृत्ति को रोकने के ठोस कदम अभी भी अपूर्ण हैं। यह स्थिति न सिर्फ प्रशासन की परीक्षा है, बल्कि पूरी सामाजिक संरचना पर एक गंभीर चुनौती बनी हुई है।
Published: May 7, 2026