पंजाब के ‘संतीनिकेतन’ में प्रेम की विरासत पर प्रशासनिक अड़चनें
पंजाब के पूर्वी भाग में स्थित संतीनिकेतन, जिसे अक्सर ‘प्रेम का शहर’ कहा जाता है, इतिहास के कई युद्धों और विभाजन की ध्वनियों को झेला है, परंतु अपने रोमांटिक कहानियों की धरोहर को जीवित रखे हुए है। स्थानीय गाइड दर्शाते हैं कि यह नगरी 1947 के विभाजन के बाद भी नयी जोड़ियों के मिलन स्थल के रूप में फली‑फूली।
परंतु इस ऐतिहासिक आकर्षण के साथ शहर की मूलभूत सुविधाओं में खाई गहरी होती दिख रही है। नगर पालिका के वार्षिक रिपोर्ट में उल्लेखित है कि सड़कों में 30 % से अधिक जगहों पर गड्ढे हैं, जबकि नालों की सफ़ाई का काम दो‑तीन साल में ही रुक जाता है। एक निवासी ने कहा, “जब प्रेम की दीवारें टूटती नहीं, तो सड़कों की दरारें बढ़ती हैं।”
नदी के किनारे स्थित ‘प्रेम जलाशय’ को नियमित जल आपूर्ति नहीं मिल पाती; कई घरों में पीने के पानी की कमी के कारण बुजुर्गों को टैंकों से पानी लाना पड़ता है। वहीं, कचरा प्रबंधन की हालत और भी बदतर है—अधिकांश कचरा निपटान स्थल तक पहुँच नहीं पाता, जिससे गली‑गलियों में कूड़ा‑करकट जमा हो गया है।
नगर अधीक्षक ने इस पर “जल्द ही एक व्यापक स्वच्छता योजना” तैयार करने की बात कही, परन्तु पिछले पांच वर्षों में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। एक स्थानीय व्यापारी ने टिप्पणी की, “पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हमें लाइटिंग और बेंचों की जरूरत है, परन्तु बजट में सिर्फ जीएनएस की रेत के ढेर के लिए ही फंड निकाले जाते हैं।”
शहर के इतिहास को संजोने वाले सांस्कृतिक महोत्सवों में भी व्यवधान आया है। वार्षिक ‘प्रेम उत्सव’ के आयोजन के लिए अगली बार केवल परेड ही नहीं, बल्कि प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन सेवाओं की भी व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है। प्रशासन का यह कदम सराहा गया, परन्तु इसका कार्यान्वयन अभी भी ‘धीरज’ के स्तर पर है।
संतीनिकेतन की प्रेम गाथा जीवित रखने के लिए नगर प्रशासन को बुनियादी बुनियादी ढांचे पर प्राथमिकता देनी होगी। अन्यथा, भले ही कहानी की पंक्तियाँ अमर हों, लेकिन यदि सड़कों की खरोंचें, पानी की कमी और कचरे की बदबू ने शहर को घेर लिया, तो आकाश में “सुधार” के शब्दों की महक भी फीकी पड़ जाएगी।
Published: May 4, 2026