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नगर में 9 साल की बच्ची पर दादाजी के बलात्कार प्रयास के विरोध में भीड़ ने किया प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश के एक उपनगरीय क्षेत्र में 9 वर्षीय बच्ची के विरुद्ध उसके दादाजी द्वारा बलात्कार का प्रयास होने के बाद स्थानीय नागरिकों ने सड़कों पर भारी जुटाव किया। घटनास्थल पर पहुँचे लोगों ने पुलिस के धीमे कार्यकलाप और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सीधे सटीक सवाल उठाए।
पुलिस ने घटना के बाद तुरंत मामला दर्ज कर फाईर (FIR) दर्ज करने का दावा किया, पर दिखा कि कई घंटे बीत जाने के बाद ही जाँच टीम स्थल पर पहुँची। यह देरी, स्थानीय मीडिया के अनुसार, दोनों ही पीड़िता के परिवार और सामुदायिक नेताओँ की नाराज़गी का मुख्य कारण रही।
प्रशासन की ओर से, जिला magistrate ने आपातकालीन आदेश जारी किया, जिससे मामला जल्द से जल्द कोर्ट में पेश किया जाए, तथा पीड़िता के परिवार को सुरक्षा उपाय प्रदान किए जाएँ। लेकिन नागरिकों का कहना है कि ऐसे आदेश अक्सर कागज़ी तौर पर ही रह जाते हैं, जबकि वास्तविक सुरक्षा का प्रावधान नहीं होता।
प्रवर्तन एजेंसियों पर भी सवाल उठे। स्थानीय पुलिस अधीक्षक ने कहा कि “समीक्षा प्रक्रिया चल रही है” और “सभी आवश्यक उपाय किए जाएंगे”। आलोचनात्मक मत रखने वाले नागरिक इस बयान को “पैसों की आवाज़ में खोया” करार देते हैं, और पूरे प्रशासनिक तंत्र को ‘आँधियों में चलती साइकिल’ की तरह तुलना करते हैं।
समाज के विभिन्न वर्गों से आए इस विरोध ने न केवल अपराधी की गिरफ्तारी की मांग की, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों की रोकथाम हेतु सख्त निगरानी, महिला एवं बाल संरक्षण योजना के त्वरित कार्यान्वयन, और पीड़ितों को शीघ्र मनोवैज्ञानिक सहायता देने की भी पुकार की।
अंत में, पुलिस ने बताया कि दादाजी को अब ‘आरोप सिद्ध होने तक’ हिरासत में रखा गया है और आगे की जाँच में सभी साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। प्रशासन ने भी कहा कि इस मामले को ‘संकट के रूप में’ मानते हुए विशेष ‘बाल संरक्षण सेल’ की पहल की जा रही है, ताकि भविष्य में इसी तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
Published: May 6, 2026