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नगर परिषद की फिल्म स्क्रीनिंग पहल में ‘दादी की शादी’ पर व्यावहारिक उलटफेर, शहरवासियों को मिला मिश्रित अनुभव
मंगलवार शाम को सरस्वती नगर के प्रमुख पार्क में स्थानीय सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में चली आ रही कॉमेडी फिल्म ‘दादी की शादी’ का खुला प्रदर्शन किया। आयोजकों का कहना था कि यह कार्यक्रम नागरिकों को सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराते हुए, शहर की सार्वजनिक स्थल उपयोगिता को उजागर करेगा।
फिल्म, जिसका निर्देशन अनिल आर. मोहन ने किया है, पारिवारिक मूल्यों पर हल्की‑फुलकी विद्रोही टिप्पणी पेश करती है। हालांकि, समीक्षा से स्पष्ट हुआ कि कहानी का अतिभार और अंत तक चलने वाला संदेश कई दर्शकों को थका देता है। यह वही भावना स्क्रीनिंग के दौरान भी महसूस हुई, जब कार्यक्रम नियोजित दो घंटे के बजाय तीन घंटे तक खिंचा, जिससे आसपास के आवासीय क्षेत्रों में देर‑रात तक शोर का सवाल उठे।
नियोजन में कई administrative लापरवाही सामने आईं। पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार पर पर्याप्त संकेतक नहीं लगाए गए, जिसके कारण दर्शकों का भीड़भाड़ में प्रवेश और निकास बाधित हुआ। ट्रैफ़िक पुलिस ने केवल अस्थायी प्रतिबंध लागू किया, परंतु मुख्य सड़कों पर जाम और आपातकालीन सेवाओं की देरी की शिकायतें गूँज उठीं। साथ ही, धूम्रपान निषेध की स्पष्ट घोषणा के बावजूद, कई दर्शकों ने नजदीकी स्नैक स्टॉल से धुएँ वाले पदार्थों की तेज़ी से बिक्री की।
स्थानीय नागरिकों ने इन खामियों को सोशल मीडिया पर उजागर किया, कुछ ने यह नोट किया कि "सांस्कृतिक कार्यक्रम का वादा बड़ा था, परंतु बुनियादी सुविधा‑सुविधा में 'दादी' की ही तरह पुरानी सोच दिखी"। कई वरिष्ठ नागरिकों ने कहा कि देर रात तक चलने वाले कार्यक्रम ने उनका आराम बिगाड़ दिया, जिससे आगामी सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान में सहयोग की संभावना भी संकोची हो गई।
इन प्रतिक्रियाओं के बाद, नगर आयुक्त ने एक संक्षिप्त प्रेस ब्रीफ़िंग दी, जिसमें उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी सांस्कृतिक पहल में "पर्याप्त सुरक्षा, सटीक टाइम‑टेबल और साफ़‑सफाई व्यवस्था" को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म की विषयवस्तु को "परिवार के भीतर स्वस्थ संवाद" के रूप में पेश किया गया था, परंतु "सार्वजनिक स्थान पर उसका उपयोग नागरिक सुविधा के अनुरूप होना चाहिए"।
सारांशतः, ‘दादी की शादी’ को दर्शकों ने कहानी के नवाचारी मोड़ के लिए सराहा, परंतु प्रशासनिक कमी ने इस सांस्कृतिक प्रयोग की नज़र को धूमिल कर दिया। शहर की आगे की योजना में यह आवश्यक है कि योजना‑निर्धारण के साथ ही बुनियादी नगर सेवा एवं नागरिक सुविधा का भी समुचित प्रबंधन किया जाए, ताकि सांस्कृतिक समृद्धि केवल शब्दों में न रह जाए, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए।
Published: May 8, 2026