नगर पुलिस ने 7 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया
स्थानीय प्रशासन द्वारा मान्यता प्राप्त व्यावसायिक परिसर के मालिक को 7 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ, जो एक झूठे निवेश योजना के माध्यम से हुआ। पुलिस ने 6 मई को दो संदिग्धों को अधिकतम 48 घंटे तक के पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया, और मामला दर्ज कर जिला दंड प्रकोष्ठ को सौंप दिया।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, आरोपियों ने व्यापारिक वर्ग के भरोसे को भुनाते हुए, एक काल्पनिक प्रोजेक्ट के नाम पर अग्रिम भुगतान लेने का चलन अपनाया। जमा राशि की क़ीमत राजस्व विभाग ने पहले ही स्थापित की थी, परंतु वित्तीय जांच में पता चला कि जमा रकम का कोई वास्तविक प्रोजेक्ट नहीं था। आरोपी अब भारतीय दण्ड संहिता के धारा 420 (धोखाधड़ी) और 406 (विश्वासघात) के तहत हिरासत में हैं।
घटनाक्रम ने स्थानीय व्यावसायियों में निवेश के प्रति भरोसा घटाने का संकेत दिया है। कई उद्यमी ने कहा कि ऐसे मामलों में नियामक निकायों की शीघ्र चेतावनी और निगरानी की कमी अक्सर अपराधियों को कार्यवाही से बचने का अवसर देती है।
नगर प्रशासन ने कहा कि इस प्रकार के आर्थिक अपराधों को रोकने के लिए पुलिस बल को तकनीकी सिखावनियों और वित्तीय अपराध इकाई को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। साथ ही, व्यापारी वर्ग को सलाह दी गई है कि किसी भी निवेश से पहले प्रोजेक्ट की वैधता की पुष्टि हेतु नियामक संस्थाओं से परामर्श करें।
सम्बन्धित पक्षों ने आशा व्यक्त की है कि न्यायिक प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी और भविष्य में इस तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
Published: May 6, 2026