नए पुलिसकों को नई तकनीक से सुसज्जित कर नई‑पीढ़ी के अपराधों से निपटना होगा
रायपुर नगर पुलिस ने मंगलवार को नई भर्ती हुए कांस्टेबलों को डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिये विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया। यह कार्यक्रम "स्मार्ट सिटीज़ – सुरक्षा पहल" के अंतर्गत आया है, जिसमें साइबर‑क्राइम, मोबाइल फ़्रॉड और डेटा‑प्राइवेसी उल्लंघनों को रोकने के लिए AI‑आधारित निगरानी, फोरेंसिक टूल्स और मोबाइल एप्लिकेशन का प्रयोग सिखाया गया।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन पुलिस तकनीकी शाखा द्वारा किया गया, जिसमें राज्य के साइबर‑सेक्योरिटी बोर्ड के विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। नई‑नई तकनीकों के प्रयोग को लेकर वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "पुस्तक‑सेमिनार नहीं, बल्कि वास्तविक‑जैस्चर में समस्या हल करने का तरीका सिखाना आवश्यक है, वरना अपराधी हमें सेफ‑हाउस मानेंगे।"
स्थानीय प्रशासन ने इस कदम को शहर की बढ़ती डिजिटल निर्भरता और बढ़ते ऑनलाइन ठगी मामलों के उत्तरदायित्व के रूप में प्रस्तुत किया। पिछले वर्ष में रायपुर में ऑनलाइन फ़ोन‑बोर्डिंग धोखाधड़ी के रिपोर्ट 27 % बढ़ी, जिससे नागरिकों को आर्थिक नुकसान और भरोसे में गिरावट का सामना करना पड़ा। इस संदर्भ में तकनीकी प्रशिक्षण को एक व्यवस्थित उपाय माना गया, परन्तु आलोचक यह भी दर्शाते हैं कि कई मामलों में बुनियादी गैजेट्स की उपलब्धता और नेटवर्क कवरेज के अभाव में प्रशिक्षण के परिणाम सीमित रह सकते हैं।
कांस्टेबल विजय कुमार, जो प्रशिक्षण सत्र में शामिल हुए, ने कहा, "पहले हम भौतिक एंट्री‑पॉइंट पर भरोसा करते थे, अब हमें ऑनलाइन ट्रैकिंग, एन्क्रिप्शन और रीयल‑टाइम डेटा विश्लेषण सीखना पड़ेगा। यह थकाऊ है, पर नागरिकों को सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है।"
नागरिक संगठनों ने भी इस पहल का स्वागत किया, परन्तु वे आशा जताते हैं कि तकनीकी पहल के साथ-साथ शारीरिक पुलिस तैनाती और त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली को भी सशक्त किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अत्यधिक डिजिटल समाधान बिना सॉलिड जमीनी बुनियादी ढाँचे के केवल “डिजिटल हवा” बनकर रह सकता है।
भविष्य में पुलिस विभाग ने बताया कि प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप एक डिजिटल डैशबोर्ड स्थापित किया जाएगा, जहाँ अपराध प्रवृत्ति, फ़्रॉड की रिपोर्ट और रिस्पॉन्स टाइम को लाइव दिखाया जाएगा। यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने और नागरिकों के भरोसे को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना गया है, बशर्ते तकनीकी सहयोग लगातार अद्यतन और कार्यान्वित हो।
Published: May 4, 2026