जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: शहर

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

नागपुर विश्वविद्यालय ने इंजीनियरिंग स्नातकों के लिए एमएससी प्रवेश संभव किया

राष्ट्रसंता तुकाराम महाराज नागपुर विश्वविद्यालय ने दिनांक 6 मई, 2026 को एक नई शैक्षणिक नीति अपनाते हुए इंजीनियरिंग स्नातकों को विज्ञान शाखा में मास्टर ऑफ साइंस (एमएससी) कोर्स में प्रवेश की अनुमति दी। यह फैसला विश्वविद्यालय के शिक्षण एवं अनुसंधान विभाग के अध्यक्ष के एक आधिकारिक विज्ञप्ति के माध्यम से घोषित किया गया।

कदम के पीछे छात्रों की शैक्षणिक आकांक्षाओं को सहयोग देना और स्नातक स्तर पर उपलब्ध विकल्पों को विस्तृत करना प्राथमिक कारण बताया गया। विश्वविद्यालय ने कहा कि इंजीनियरिंग की बैकग्राउंड वाले विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी आदि जैसे क्षेत्रों में मौलिक ज्ञान एवं अनुसंधान कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।

नया नियम लागू करने के लिए विश्वविद्यालय ने पहले ही इंजीनियरिंग स्नातकों के लिये निर्धारित योग्यता मानदंड तय कर लिये हैं। अभ्यर्थियों को 55 प्रतिशत या उससे अधिक ग्रेड, तथा संबंधित विज्ञान विषयों में बुनियादी प्रवीणता प्रमाणित करने हेतु एक प्रवेश परीक्षा पास करनी होगी। इस प्रक्रिया में अभियांत्रिकी कॉलेजों के सहयोगी संस्थानों को भी सूचीबद्ध किया गया है, जिससे प्रवेश के समय कोई अनियमितता न हो।

नागपुर में कई निजी तथा सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों के विद्यार्थी इस कदम को “विचारशील” सराह रहे हैं, क्योंकि अब उन्हें दो वर्ष की अतिरिक्त पढ़ाई के बाद शोध एवं अध्यापन के बेहतर मार्ग मिल सकते हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय ने बताया कि नई नीति के तहत कुल 400 एमएससी सीटें आवंटित की जाएँगी, जहाँ से 250 सीटें इंजीनियरिंग स्नातकों को दी जाएँगी। शेष सीटें पारंपरिक विज्ञान स्नातकों को प्रदान की जाएँगी।

स्थानीय प्रशासन की ओर से इस पहल को “शिक्षा के बहु-परिवर्तनात्मक परिदृश्य का सकारात्मक संकेत” कहा गया, जबकि कुछ शैक्षणिक विशेषज्ञों ने सूखा व्यंग्य के साथ सवाल उठाया: “जब नौकरी के बाजार में धुंधलापन है, तो विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक द्वार में नई खिड़कियां खोल दीं, पर क्या यह खिड़की साफ़ है?” उन्होंने यह भी कहा कि यदि बुनियादी ढाँचा, प्रयोगशालाओं की उपलब्धता और शोध निधि में सुधार नहीं हुआ, तो यह नीति केवल कागज़ी हो सकती है।

विचार-विमर्श के दौर में विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि आगामी आर्थिक वर्ष में लैब उपकरण, फिजिकल लाइब्रेरी एवं प्रोफेसर नियुक्तियों में अतिरिक्त निवेश किया जाएगा, ताकि इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले छात्रों को सटीक वैज्ञानिक प्रशिक्षण मिल सके। इसके अलावा, छात्रों को एक व्यापक कैरियर परामर्श सेवा प्रदान करने का भी प्रावधान किया गया है, जो उन्हें उद्योग, अनुसंधान संस्थान और शैक्षणिक क्षेत्र में संभावित रोजगार की ओर मार्गदर्शन करेगी।

सम्पूर्ण रूप में, नागपुर विश्वविद्यालय की यह पहल शैक्षणिक विविधता और स्नातक-पर-परिचालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निकली प्रतीत होती है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव तब ही स्पष्ट होगा जब प्रशासनिक व बुनियादी सुविधाओं का समुचित प्रबंधन सिद्ध हो और छात्रों को अपेक्षित गुणवत्ता का अनुभव हो।

Published: May 7, 2026