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Category: शहर

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नागपुर में 65% नालियों की डि‑चोकिंग अभी भी मैन्युअल, जबकि मैनुअल स्कैवेंजिंग पर लगा प्रतिबंध

नागपुर नगर निगम (एनएमसी) के आंकड़ों के अनुसार शहर की कुल नालियों में से लगभग 65 प्रतिशत अभी भी मैन्युअल रूप से डि‑चोकिंग की जा रही है। यह तथ्य 2013 में भारत सरकार द्वारा लागू किए गए ‘प्रोहेबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट अस मैन्युअल स्कैवेंजर्स (प्रिवेंशन) एक्ट’ के विपरीत है, जिसके तहत किसी भी प्रकार की शारीरिक सफ़ाई कार्य में मानव श्रम का प्रयोग प्रतिबंधित है।

रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया कि इस मैन्युअल कार्य को अक्सर असमान्य श्रमिकों, दैनिक मज़दूरों या ठेकेदारों को दिया जाता है। इन श्रमिकों को तेज़ी से जमा हुए कचरे, तेलीय अवशेष और विषैला जल के संपर्क में लाया जाता है, जिससे श्वसन, त्वचा और जठरांत्र संबंधी रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।

नगर प्रशासन का यह कहना है कि मौजूदा बजट और उपकरणों की कमी के कारण कई जगहों पर यंत्रात्मक सफ़ाई संभव नहीं हो पाई है। एनएमसी ने दो साल पहले स्वच्छता मिशन के तहत ‘ड्रेन स्यूशन मैशीन’ की खरीद का प्रस्ताव पेश किया था, परंतु अब तक बड़े पैमाने पर पूर्ति नहीं हुई। परिणामस्वरूप, स्थानीय ठेकेदारों को आउटसोर्स कर दिया गया है, जिससे अनियमित श्रम बाजार में नई राह खुली है।

स्वास्थ्य विभाग ने इस विकास को ‘सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा’ कहा है और तुरंत मशीन‑आधारित सफ़ाई के लिए वित्तीय सहयोग की मांग की है। साथ ही, सामाजिक न्याय एवं अधिकारों के समर्थन में कार्यरत NGOs ने भी इस उलटफेर पर ‘कानूनी कार्रवाई’ की चेतावनी दी है, क्योंकि मैन्युअल स्कैवेंजिंग पर प्रतिबंध स्पष्ट रूप से लागू नहीं हो रहा है।

इस मुद्दे ने नागरिकों में भी असंतोष बढ़ा दिया है। कई प्रवासी परिवारों ने सोशल मीडिया पर अपने परिवार के सदस्य की शारीरिक कठिनाई और असुरक्षित कार्य परिस्थितियों की शिकायतें दर्ज की हैं। स्थानीय प्रेस ने इस तथ्य को उजागर करने के बाद नगर निगम को शीघ्रता से मशीनरी उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि नालियों की सफ़ाई में वैज्ञानिक पद्धति अपनाई जा सके।

भविष्य की दिशा निश्चित रूप से दो मोड़ों पर टिकी है: या तो नगर प्रशासन बजट में प्राथमिकता दे कर औद्योगिक‑स्तर की ड्रेन स्यूशन मशीनें लगाना शुरू करे, या फिर मैन्युअल श्रमिकों को भर्ती करके मौजूदा कानूनी प्रतिबंध को तोड़ता रहे। वर्तमान में, प्रशासनिक चेतावनी और सामाजिक दबाव ही इस समस्या के समाधान के संभावित एकमात्र साधन प्रतीत होते हैं।

Published: May 6, 2026