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नोएडा हवाई अड्डे के टिकट दामों को लेकर MLA ने उठाई चिंता, दरें IGI जैसी ही

उत्तरी प्रदेश के एक प्रतिनिधि ने नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (नव निर्माण) से निकलने वाले टिकटों को महंगा बताकर सरकार को सतर्क किया। उनका कहना है कि नई सुविधा के कारण यात्रियों को कम किराए की अपेक्षा थी, पर वास्तविक दरें राज्य के प्रमुख हवाई अड्डे, इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (IGI) के बराबर निकली हैं।

हवाई अड्डा प्राधिकरण ने इस मुद्दे का जवाब देते हुए कहा कि सभी मार्गों पर लागू किराए राष्ट्रीय नियमन के अंतर्गत आते हैं और वर्तमान में कोई अतिरिक्त प्रीमियम नहीं लगाया गया है। इस प्रकार, नोएडा से IGI तक की यात्रा में लागत में कोई अंतर नहीं है—शायद इसलिए कि नया हवाई अड्डा अभी भी शुरुआती चरण में है और बाजार‑संवेदनशील मूल्य निर्धारित करने में देर हो रही है।

इसी दौरान, एयरलाइन्स के कैलेंडर में एक और असंगति स्पष्ट हुई। इंडिगो ने अपने आधिकारिक वेबसाइट पर 15 जून के बाद लखनऊ‑नोएडा मार्ग की सभी उड़ानों को हटा दिया, जिससे यात्रियों को भ्रमित किया। वही कंपनी ने अगले दिन घोषणा की कि 1 जुलाई से इस मार्ग पर दैनिक उड़ानें शुरू की जाएँगी। इस दोहरी सूचना ने स्थानीय यात्रियों को अनावश्यक झंझट में डाल दिया और यह प्रश्न उठाया कि सार्वजनिक सेवाओं के शेड्यूलिंग में किस हद तक पारदर्शिता और समय‑समानता बरती जा रही है।

इन घटनाओं का प्रत्यक्ष असर आम जनता पर पड़ रहा है। नोएडा के कई व्यावसायिक वर्ग के लोग, जो रोज़ IGI या अनंत महल तक यात्रा करते हैं, आशा करते थे कि नया हवाई अड्डा उन्हें समय‑सत्र में बचत तथा किफायती किराया देगा। लेकिन समान दरें और अनिश्चित टेम्प्लेट के कारण न केवल आर्थिक बचत नहीं हुई, बल्कि यात्रा की योजना बनाना भी कठिन हो गया।

स्थानीय प्रशासन और हवाई अड्डा प्राधिकरण की इस स्थिति पर सूक्ष्म आलोचना भी जरूरी है। नई बुनियादी ढाँचे का निर्माण जबकि उत्साह से भरपूर होता है, लेकिन उसके संचालन में देरी, सूचना का अधूरा प्रसारण और मूल्य‑निर्धारण में पारदर्शिता की कमी, नागरिक भरोसा घटा देती है। यह वह ‘सड़क’ है जहाँ नियम‑कानून को लागू करने की जल्दी नहीं, बल्कि उनका सही‑समय पर कार्यान्वयन आवश्यक है—एक ऐसी बात जो अब तक ‘उड़ान’ नहीं भर पाई।

Published: May 9, 2026