नोएडा में स्विमिंग पूल को 10 बजे बाद बंद करने का आदेश
नोएडा विकास प्राधिकरण (एनडीए) ने आज सुबह एक पारित हो चुकी सलाह के अन्तर्गत सभी स्विमिंग पूलों के संचालन के घंटे निर्धारित कर दिए हैं। नियम के अनुसार पूल केवल दो समयावधियों में खुलने की अनुमति प्राप्त करेंगे – सुबह 5.30 बजे से 9.30 बजे तक और दोपहर 4 बजे से रात 10 बजे तक। इस आदेश में यह स्पष्ट किया गया कि 10 बजे के बाद किसी भी पूल को खुले रहने की अनुमति नहीं होगी।
नोएडा, जो अपनी योजनाबद्ध बुनियादी ढाँचे और उच्च जीवन स्तर के लिये जाना जाता है, में अब एक और प्रशासनिक प्रतिबंध जुड़ गया। प्राधिकरण ने इस कदम के पीछे ‘शोर‑गुल नियंत्रण’, ‘ऊर्जा संरक्षण’ और ‘सुरक्षा मानकों की पालना’ को प्रमुख कारण बताया। हालांकि, स्थानीय नागरिकों ने इस समय‑निर्धारण को ‘अतिरिक्त जड़ता’ के रूप में ख़ारिज किया, क्योंकि कई अभ्यासी शाम के समय, विशेषकर 10 बजे से बाद की ठंडी हवा में तैराकी को स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं।
प्राधिकरण के अधिकारी इस प्रतिबंध को लागू करने के लिए मिलनसार कड़ी के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, फिर भी यह सवाल अभी बना हुआ है कि क्या ऐसी ‘सलाह’ को मौखिक या लिखित रूप में नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं रहती। यदि पालन न करने पर दण्ड की संभावना नहीं बताई गई है, तो नियम की प्रभावशीलता पर संदेह बना रह सकता है।
नागरिकों पर पड़ने वाला प्रभाव स्पष्ट है। कई फिटनेस क्लबों ने अगला अध्याय लिखने के लिए अपने समय‑सारणी में बदलाव करने की घोषणा की है, जिससे मौजूदा सदस्यता शुल्क में संभावित वृद्धि हो सकती है। साथ ही, बच्चों के स्कूल‑समय बाद के खेल‑सत्र और वरिष्ठ नागरिकों के शारीरिक व्यायाम पर भी असर पड़ेगा।
स्थानीय व्यापारियों ने इस आदेश को ‘ब्यूरोक्रेसी की नई कहानी’ बताया, जहाँ मापदंडों का प्रावधान अक्सर वास्तविक आवश्यकताओं के साथ असंगत रहता है। इस बीच, नोएडा का जल‑प्रबंधन विभाग इस निर्णय को ‘जल बचत’ के बड़े अभियान के हिस्से के रूप में उजागर कर रहा है, जिससे कम यूज्ड पानी का हिसाब‑किताब भी इस प्रतिबंध के पीछे का एक अलग कारण बन जाता है।
समग्र रूप से, नोएडा में स्विमिंग पूल के संचालन समय को सीमित करने का यह कदम प्रशासनिक अनुशासन को दिखाने के लिये पर्याप्त लग सकता है, परंतु इसका वास्तविक प्रभाव उन लोगों पर पड़ेगा, जिन्हें देर शाम की ठंडी हवा में एक तैराकी सत्र की सबसे ज्यादा जरूरत है। आगे यह देखना बचेगा कि प्राधिकरण इस नियम को लचीलेपन के साथ लागू करेगा, या फिर ‘सुटी हुई बाथरूम‑टॉइलेट‑निर्देश’ के रूप में इसे फिर से संशोधित किया जाएगा।
Published: May 5, 2026