नोएडा में बिजली की स्थिर आपूर्ति के लिये 250 ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जाएंगे
उदयमान पूर्ति के दायरे में उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा विकास प्राधिकरण ने मिलकर 250 नई ट्रांसफॉर्मर स्थापित करने की योजना घोषणा की है। यह कदम, जिसने पिछले कुछ वर्षों में बार-बार बिजली कटौती के कारण बढ़ती नागरिक असंतोष को ध्यान में रखा, शहर के प्रमुख इलाकों में पावर सप्लाई को स्थिर करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में कई उपभोक्ताओं को दिन में दो‑तीन बार वोल्टेज में गिरावट या पूर्ण कटौती का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को हल करने के लिए लगभग 150 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें ट्रांसफॉर्मर की खरीद, स्थापिती और पंजीकरण कार्य शामिल हैं। निर्माण कार्य अगले दो महीनों में शुरू होकर वर्ष के अंत तक समाप्त हो जाएगा, यह अनुमान प्रशासन ने दिया है।
निवासियों ने इस योजनापर प्रशंसा और संदेह दोनों की आवाज़ उठाई है। जहाँ कई लोग आशावादी हैं कि “बिना लाइट के रातें अब नहीं रहेंगी,” वहीं कुछ समूह यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या केवल उपकरणों की संख्या बढ़ाने से मौजूदा नेटवर्क की बुनियादी खामियों, जैसे पुरानी केबलें और अनियमित रख‑रखाव, को भी ठीक किया जाएगा। शहर के कुछ क्षेत्र में अभी भी वितरण मंडलों की अनुपलब्धता के कारण बल्ब जलते‑जलते थक चुके हैं।
प्रशासन ने इन चिंताओं को स्वीकार करते हुए कहा कि ट्रांसफॉर्मर स्थापिती के साथ साथ मौजूदा नेटवर्क की नियमित जांच और आवश्यक मरम्मत कार्यों को भी समान प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश बिजली बोर्ड ने आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को तेज करने और डिस्कनेक्टेड कंज्यूमर कॉम्प्लेंट्स के समाधान अवधि को 48 घंटों के भीतर घटाने का लक्ष्य रखा है।
स्थानीय व्यापारियों और शैक्षणिक संस्थानों ने भी इस योजना को “आधारभूत सुविधा में आवश्यक सुधार” के रूप में सराहा है। देर रात तक चलने वाले आईटी हब्स और छोटे उद्योगों के लिए निरंतर पावर सप्लाई उत्पादन और रोजगार की स्थिरता के लिये महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में, 250 ट्रांसफॉर्मर की पूर्ति, यदि समय पर पूरी हो, तो न केवल वर्तमान पावर‑कट की समस्या को घटाएगी, बल्कि भविष्य में नई विकास परियोजनाओं के लिये एक मजबूत इलेक्ट्रिक बुनियाद भी तैयार करेगी।
विचारशील आलोचक यह नोट करते हैं कि नगर प्रशासन ने अक्सर बड़े‑पैमाने पर सुविधाएँ प्रदान करने का वादा किया, पर उनका कार्यान्वयन विलंबित रहा है। इस बार, यदि कार्य समय‑सीमा के भीतर पूरा होता है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही के नए मानक स्थापित कर सकता है। अन्यथा, यह फिर से एक और “घोषित योजना पर ठहराव” का उदाहरण बन सकता है।
Published: May 4, 2026