जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: शहर

विज्ञापन

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़ में वकील की आवश्यकता है?

आपराधिक मुकदमों, जमानत, गिरफ्तारी, एफआईआर, जांच और उच्च न्यायालयी कार्यवाही से जुड़े कानूनी मार्गदर्शन के लिए यहां क्लिक करें

नोएडा में आरटीई के आधे स्लॉट खाली, 25 निजी स्कूलों को नोटिस

उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र नोएडा में, सरकारी राइट टू एजुकेशन (RTE) अधिनियम के तहत निजी स्कूलों को आरक्षित 25% सीटों में से लगभग आधी अभी भी खाली हैं। इस कमी को पाटने के प्रयास में, शहर के डीमैंडर (DM) ने 25 निजी विद्यालयों को आधिकारिक नोटिस जारी किया है, जिसमें प्रधानाचार्यों को 7 मई को विस्तृत प्रवेश रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।

आरटीई नियम के अनुसार, प्रत्येक निजी स्कूल को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को समान शैक्षणिक अवसर प्रदान करने हेतु कुल छात्रसंख्या का एक चतुर्थांश आरक्षित रखना अनिवार्य है। नोएडा में लागू 144 निजी स्कूलों में से केवल आधे ही इन आरक्षित सीटों को भर पाए हैं, जिससे लक्ष्य की प्राप्ति में स्पष्ट दृश्यमान अंतर बनता है।

डीएम के कार्यालय ने बताया कि नोटिस में उल्लिखित 25 विद्यालयों को कई बार याद दिलाने के बाद भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे प्रशासन को संकल्पित करना पड़ा कि अब सभी प्रधानाचार्य 7 मई को उस समय उपस्थित हों, जब उन्हें प्रवेश प्रक्रिया, चयन मानदंड, और चयनित छात्रों की सूची प्रस्तुत करनी होगी। यह कदम, हालांकि कड़ा है, लेकिन प्रशासन की इस रुकावट को तोड़ने की दृढ़ता को दर्शाता है।

स्थानीय नागरिक समूहों ने इस देरी को ‘सुनियोजित अज्ञानता’ कहा है, जिससे न केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शिक्षा का हक मिलना असफल हो रहा है, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता भी धूमिल हो रही है। वहीं, कई स्कूल प्रशासकों ने संकेत दिया कि उचित दस्तावेज़ीकरण की कमी और पारदर्शी आवेदन प्रक्रिया की अनुपस्थिति के कारण अक्सर इच्छुक परिवारों तक सूचना नहीं पहुँच पाती।

शहर की शिक्षा विभाग ने कहा कि नोटिस के बाद यदि स्कूलों द्वारा उचित कदम नहीं उठाए गए तो उन्हें गैर-सम्पूर्णता के लिये आर्थिक दंड या आगे की कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इस संदर्भ में, प्रशासन का त्वरित रूप से “डाटा‑ड्रिवेन” निरीक्षण और अनावश्यक नौकरशाही को हटाना आवश्यक है, ताकि आरटीई के लक्ष्य को साकार किया जा सके।

आरटीई के प्रावधानों को लागू करने में इस प्रकार की व्यवधानें अक्सर सार्वजनिक वित्तीय संसाधनों के कुशल उपयोग को सवाल के घेरे में ले आती हैं। चाहे यह प्रशासनिक लापरवाही हो या नियमों की अड़चनों से उत्पन्न जटिलता, परिणामस्वरूप वह बच्चे रह जाते हैं, जिन्हें शिक्षा का अधिकार मिला है लेकिन वह अक्सर कागजों में ही रहता है।

नोएडा के नागरिकों की आशा है कि 7 मई के बाद की रिपोर्टिंग से स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी, और अनुपालन न करने वाले शैक्षणिक संस्थानों को समय सीमा के भीतर सुधार करने का अवसर मिलेगा। यह केवल एक प्रशासकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि नगर के सामाजिक विकास की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

Published: May 6, 2026