नोएडा में 7,000 कर्मियों ने शुरू किया घर सूची निर्माण अभियान
नोएडा नगर निगम ने 3 मई को आधिकारिक तौर पर 7,000 कर्मचारियों को घर-घर जाकर संपत्ति सूची तैयार करने का आदेश दिया। यह प्रयास अगले वित्तीय वर्ष में नगरपालिका के आय स्रोतों को सुदृढ़ करने और आगामी स्मार्ट‑सिटी परियोजनाओं के लिये सटीक आधारभूत डेटा सुनिश्चित करने के लिये उठाया गया है।
शहर के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्रीय उद्यम—भारत भारी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) और गैल (इंडिया) लिमिटेड—से भी अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध कराया गया। इन कंपनियों के कर्मचारियों को अस्थायी रूप से नगरपालिका कार्यों में शामिल किया गया, ताकि मौजूदा स्टाफ की कमी जल्द से जल्द पाटी जा सके। यह कदम प्रशासनिक योजना में नज़र आने वाले ‘मानव संसाधन के अंतराल’ को छुपाने के लिये एक त्वरित समाधान का रूप ले रहा है।
सूची निर्माण की विधि स्पष्ट नहीं है, परन्तु रिपोर्टों के अनुसार, टीमों को प्रत्येक वार्ड में इकट्ठा होकर घर के सामने साइन बोर्ड लगाकर, मालिकों से दस्तावेज़ी जानकारी एकत्र करने का निर्देश दिया गया है। नागरिकों को बताया गया है कि यह प्रक्रिया केवल कर‑आधार के लिये होगी, परन्तु कई निवासी इस बात से असहज दिख रहे हैं कि अचानक उनके पड़ोस में ‘सूची दल’ की कतारें लग गईं।
स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि इस विशाल ऑपरेशन से ट्रैफ़िक जाम और व्यावसायिक घंटे में व्यवधान हुआ। कुछ ने यह भी कहा कि आधे घंटे के लंच ब्रीक के बाद भी कर्मी वही जगह पर दो‑तीन घंटे रुकते हैं, जिससे गली‑गली में इकठ्ठा होने वाले लोगों की संख्या बढ़ जाती है। यह ‘डाटा‑संकलन‑महामारी’ के रूप में कुछ नागरिकों के बीच व्यंग्यात्मक टिप्पणी का कारण बना।
ऐसे बड़े पैमाने पर मानवशक्तियों को तैनात करने के पीछे एक स्पष्ट राजनीतिक प्रेरणा भी देखी जा सकती है। चुनावी वर्ष के करीब आते ही नगर निगम को अपने कार्य‑प्रदर्शन को दिखाने के लिये ‘अधिदृष्टि‑भरी’ पहलें शुरू करनी पड़ती हैं। इस प्रकार, 7,000 कर्मियों की सूची निर्माण टीम न केवल आंकड़ों को इकट्ठा करने में मदद करेगी, बल्कि आगामी बजट बंटवारे में नगर निगम को ‘दिखावा‑परिचालन’ का भी अवसर प्रदान करेगी।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस अभियान को सफलतापूर्वक चलाया गया, तो नगर निगम को आगे के विकास कार्यों में अधिक भरोसेमंद आँकड़े मिलेंगे। परन्तु प्राथमिक चुनौती फिर भी डेटा की सटीकता, नागरिकों का सहयोग, तथा इस तात्कालिक समाधान के बाद मानव संसाधन की दीर्घकालिक योजना को सुदृढ़ बनाना होगी। वर्तमान में, यह परियोजना प्रशासनिक तत्परता का एक ‘प्रयोगशाला’ बनकर उभर रही है—जहाँ ‘सिस्टम का लूप’ और ‘पारदर्शिता की चाह’ दोनों ही एक ही मंच पर मुलाक़ात कर रहे हैं।
Published: May 4, 2026