नोएडा‑गाज़ियाबाद में डिजिटल जनगणना के लिये आरडब्ल्यूए को आमंत्रित
नोएडा विकास प्राधिकरण (एनडीए) और गाज़ियाबाद नगर निगम ने आज सुबह एक संयुक्त घोषणा में शहरी क्षेत्रों में डिजिटल जनगणना शुरू करने की योजना को औपचारिक रूप दिया। इस पहल का प्रमुख माध्यम स्थानीय निवासी कल्याण संगठनों (Resident Welfare Associations – आरडब्ल्यूए) से सहयोग प्राप्त करना है, जिससे घर-घर तक सूचना पहुंचाने की गति बढ़ेगी और डेटा की सटीकता में सुधार होगा।
शहरों के बड़े‑छोटे कस्बाई इलाकों में लगभग 6.5 लाख घरों को लक्षित किया गया है। प्रशासन ने बताया कि पारम्परिक कागजी सर्वेक्षण की तुलना में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म न केवल समय बचत करेगा, बल्कि दस्तावेजीकरण की त्रुटियों को भी कम करेगा। आरडब्ल्यूए को प्रशिक्षण सत्र, मोबाइल एप्प‑आधारित डेटा एंट्री टूल और 24 घंटे सहयोगी हेल्पलाइन प्रदान की जाएगी।
आरडब्ल्यूए की अध्यक्ष, शालीना अग्रवाल (नोएडा) ने कहा, “हम निवासियों के निकट रहते हैं, इसलिए इस योजना के सफल कार्यान्वयन में हमारी भूमिका अहम हो सकती है। लेकिन हमें आशा है कि तकनीकी समर्थन सुदृढ़ रहेगा, नहीं तो सरलग कंप्यूटर‑कुर्सी से काम नहीं बनेगा।”
शहर निदेशक, उदय शर्मा ने बताया कि जनगणना के परिणामों का उपयोग आवास योजना, जल‑विद्युत् वितरण, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और भविष्य की शहरी विकास रणनीतियों में किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि डेटा सुरक्षा एवं व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता को लेकर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, हालांकि इस वादे को तकनीकी बुनियाद की क्षमताओं की परीक्षा लेनी पड़ेगी।
स्थानीय नागरिकों की प्रतिक्रियाएं मिश्रित रही हैं। कुछ निवासी, जैसे गाज़ियाबाद के सईदाबाद कॉलोनी के रहवासी राजेश सिंह, ने कहा, “डिज़िटल हिसाब-किताब से हमें जल्दी मदद मिल सकती है, बशर्ते इंटरनेट कनेक्शन ठीक रहे।” वहीं दहरी नगर में कुछ बुजुर्गों ने बताया कि “हमारे पास स्मार्टफ़ोन नहीं है, और कागजी फॉर्म अभी भी हमारा भरोसा है।”
प्रशासन ने इन समस्याओं को हल करने हेतु प्रत्येक आरडब्ल्यूए को “डिजिटल छत्र” प्रदान करने का वचन दिया है, जिसमें टेबल्ट, मोबाइल डेटा पैक और तकनीकी सलाहकार शामिल होंगे। इसके अलावा, नज़रबंदी में सुधार और डेटा की दोहराव को रोकने के लिये एक केंद्रीकृत सर्वर स्थापित किया जाएगा।
इस योजना की सफलता से न केवल शहरी योजना निर्माताओं को त्वरित आंकड़े मिलेंगे, बल्कि यह भी सिद्ध होगा कि स्थानीय निकाय और नागरिक संगठनों के बीच सहयोगी संरचना वास्तविक समस्याओं को हल करने में सक्षम है। अन्य भारतीय मेट्रो शहरों में भी इस मॉडल को दोहराने की संभावना पर चर्चा चल रही है, जबकि यह देखना बाकी है कि डिजिटल बुनियादी ढाँचा और सामुदायिक सहभागिता किस हद तक तालमेल बिठा पाएँगी।
Published: May 6, 2026