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Category: शहर

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नोइडा में विफल ई‑साइकल योजना को फिर से चालू करने की पहल

नोइडा विकास प्राधिकरण ने 2022‑23 वित्तीय वर्ष में शुरू की गई इलेक्ट्रिक साइकिल (ई‑साइकल) योजना को पुनर्जीवित करने के लिए एक विस्तृत कार्यधारा प्रस्तुत की है। इस परियोजना को मूलतः शहर के ट्रैफ़िक को कम करने, जलवायु‑सफ़ाई को बढ़ावा देने और नागरिकों को क़ीमत‑परक हरित‑परिवहन विकल्प प्रदान करने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था। शुरूआती चरण में 20 डॉकींग स्टेशनों पर 300 ई‑साइकल उपलब्ध कराई गईं, परन्तु एक साल के भीतर ही संपूर्ण योजना पूरी तरह से ठप्प पड़ गई।

पहले चरण में प्रमुख रुकावटें आर्थिक अनुशासन की कमी, रख‑रखाव की निरंतरता न हो पाना और निजी ऑपरेटर के साथ अनुबंध‑शर्तों का स्पष्ट न होना थीं। सार्वजनिक उपयोग में अपेक्षा से कम सहभागिता के साथ बिखरी हुई साइकलें और खाली डॉकींग स्टेशनों ने नागरिकों में निराशा उत्पन्न की, जबकि स्थानीय मीडिया ने इसे ‘पैसे का बर्बाद खर्च’ के रूप में उजागर किया।

अब प्राधिकरण ने पिछले अनुभवों को ध्यान में रखकर पुनरावर्ती कदम उठाए हैं। प्रमुख उपायों में नई सार्वजनिक‑निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत एक विश्वसनीय कंसोर्टियम को नियुक्त करना, अतिरिक्त 40 करोड़ रुपये की निधि आवंटित करना, मौजूदा डॉकींग स्टेशनों का डिजिटल अपग्रेड करना और इसे शहर के एकीकृत ‘स्मार्ट मोबिलिटी एप’ से जोड़ना शामिल है। साथ ही, एक स्वतंत्र निगरानी समिति का गठन किया गया है जो लागत‑प्रभावशीलता, उपयोग‑दर और रख‑रखाव के मानकों की त्रैमासिक समीक्षा करेगी।

पर्यावरणीय एवं सामाजिक लाभों की संभावनाएँ स्पष्ट हैं – बेहतर कनेक्टिविटी, कम कार्बन उत्सर्जन और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद की जा रही है। परन्तु, प्रशासनिक पुनरावृत्ति पर सतर्क नज़रें बनी हुई हैं। आलोचकों का तर्क है कि इस बार भी पर्याप्त नियोजन‑नियंत्रण नहीं किया गया तो पुनः विफलता का जोखिम बना रहेगा। वे यह भी याद दिलाते हैं कि कई शहरी परियोजनाओं में ‘भव्य घोषणा‑परियोजना‑घोषणा’ का चक्र अक्सर जनता के भरोसे को धूमिल कर देता है।

भविष्य में इस पहल का सफल कार्यान्वयन नोइडा के सार्वजनिक‑सेवा शिल्प में एक महत्त्वपूर्ण मील‑पत्थर हो सकता है, बशर्ते कि नियामक ढाँचा सुदृढ़ हो और नागरिक सहभागिता को प्रोत्साहन‑प्रणाली द्वारा निरंतर पनपने का अवसर मिले। इस संदर्भ में प्रशासन का यह कदम न केवल एक ‘पुनर्जीवन’ के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि नगर नियोजन में लगन और उत्तरदायित्व के मानकों को परखने का भी मंच बन चुका है।

Published: May 6, 2026