दाहोद में चुनाव पराजय के बाद लाइटों की उखाड़‑फेंक, जांच जारी
गुजरात के दाहोद शहर में स्थानीय चुनाव में हार के बाद लाइटों को ध्वस्त करने के मामले में हाल ही में जांच शुरू हुई है। नगर निगम के कर्मचारियों को रायदार के प्रतिपक्षी दल के कार्यवाहियों के तहत सार्वजनिक मार्गों से प्रकाशस्तंभ निकालते पकड़ा गया, जिसके परिणामस्वरूप कई मोहल्लों में रात‑भर अंधकार छा गया।
पिछले महीने दाहोद शहरी पंचायती एरिया (एसपीए) के असेंबली उम्मीदवार ने दो विरोधियों को वोट मिलने के बाद रात्रि में कई प्रमुख सड़कों की लाइटें हटवा दीं, यह आरोप नगरपालिका विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रस्तुत किया। यह कार्य न केवल सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि मतदान के परिणाम को बदनाम करने के लिये इरादा‑सहित किया गया प्रतीत होता है।
नगर निगम के मुख्य अधिकारी ने कहा, “सड़क प्रकाश व्यवस्था का अधिग्रहण और हटाना कानून के दायरे में नहीं आता। हम इस कार्रवाई की पूरी जाँच कर रहे हैं और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करेंगे।” साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस घटना ने नागरिकों की दैनिक जीवन‑शैली पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है, क्योंकि कई स्कूल, अस्पताल व सार्वजनिक परिवहन स्टेशनों पर प्रकाश के अभाव ने असुविधा उत्पन्न की।
विरोधी दल के प्रमुख ने यह आरोप लगाया कि यह एक ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ है, जिसका उद्देश्य चुनावी हार के बाद दायित्व से बचना और जनता को भयभीत करना है। उन्होंने बताया कि उन्होंने नगर निगम को लिखित नोटिस भेजा है, जिसमें तुरंत लाइटों की पुनर्स्थापना और दोषियों की सजा की मांग की गई है।
स्थानीय नागरिक संघों ने इस ‘अंधेरे राजनैतिक खेल’ पर निंदा की और मांग की कि संचालित जांच पारदर्शी हो। एक निवासी ने कहा, “संकट के समय हम उम्मीद करते हैं कि लाइटें जलें, न कि अल्पकालिक राजनीतिक गुस्से में बिजली के तार उखाड़े जाएँ।”
वर्तमान में नगर निगम ने बीती रात में लाइटों को फिर से स्थापित करने के लिये एक आपातकालीन योजना अपनाई है, जबकि पुलिस जांच टीम ने गवाहों की बयानबाजी और वीडियो साक्ष्य एकत्र करने प्रक्रिया को तेज कर दिया है। प्रशासन को आशा है कि इस मामले की सच्चाई सामने आएगी और भविष्य में ऐसी ‘रोशनी‑उखाड़’ घटनाओं से बचा जा सकेगा।
Published: May 4, 2026