दिल्ली में नकली कॉल सेंटर चलाने के आरोप में सात लोग गिरफ्तार
नई दिल्ली – शहर के पुलिस ने 2 मई को एक बड़े पैमाने पर चल रहे नकली कॉल सेंटर की जाँच के अंतर्गत सात व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया। ये व्यक्तित्व, जिन्हें अब तक ‘फ्रॉड कॉल ऑपरेटर’ कहा जा रहा है, अपने ठेकेदारों के धंधे के तहत कॉन्टैक्ट सेंटर का ढाँचा तैयार कर, विभिन्न ठगी योजनाओं में भाग ले रहे थे।
जांच में यह सामने आया कि इस केन्द्र के माध्यम से कई नागरिकों को फर्जी बैंकर या सरकारी अधिकारी का रूप लेकर फोन करके आर्थिक नुकसान पहुँचाया गया। पुलिस ने बताया कि इस सेंटर के नेटवर्क में यूएसबी ड्राइव और क्लाउड सर्वर का उपयोग किया गया था, जिससे डेटा रूटिंग में गुप्तता बनी रही। कुल मिलाकर, संभावित नुकसान दर्ज करने के आधार पर अनुमानित नुकसान 6 करोड़ से अधिक रुपए हो सकता है।
सचिवालय के साइबर क्राइम विभाग ने इस ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कड़ाई से तकनीकी सबूत इकट्ठा कर, फोन कॉल रिकॉर्ड, आईपी ट्रेस और वित्तीय लेन‑देन की जाँच की। विभाग के प्रवक्ता ने कहा, “ऐसे जालसाज़ी कॉल सेंटरों को नष्ट करना हमारे डिजिटल सुरक्षा के लक्ष्यों में से एक है, और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नागरिकों को ऑनलाइन और फोन के माध्यम से धोखाधड़ी से बचाया जा सके।”
विरोधी दल और नागरिक संगठनों ने इस मामले पर प्रशासन को कठोर कदम उठाने की मांग की। वे तर्क देते हैं कि ऐसी घोटालों की निरंतरता प्रशासनिक निगरानी में खामियों को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉल सेंटर लाइसेंसिंग प्रक्रिया में मौजूदा नियामकों को अधिक सख्त मानक और नियमित ऑडिट की आवश्यकता है, जिससे काले रहस्य के तहत चलने वाले व्यवसायों को रोकना संभव हो सके।
पीड़ितों ने पुलिस को बताया कि उन्हें फोन पर धीरज दिखाते हुए, अक्सर ‘सरकारी कार्यवाही’ या ‘बैंक की आवश्यक जानकारी’ उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। इस प्रकार की धोखाधड़ी न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि नागरिकों का भरोसा भी तोड़ देती है। पुलिस ने हड़ताल के बाद सभी प्रभावित पक्षों को पुनः संवाद स्थापित करने और संभावित प्रतिपूर्ति के लिए सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।
आगे की जांच में यह भी स्पष्ट किया गया कि इस सेंटर की कुछ शाखाओं ने दिल्ली के बाहर के राज्यों में भी कार्य किया था, जिससे अंतरराज्यीय सहयोग की आवश्यकता बनती है। पुलिस ने कहा कि इस दिशा में तुरंत एक समन्वित ‘डिजिटल फॉरेंसिक टास्क फोर्स’ का गठन किया जाएगा, जिससे भविष्य में ऐसी घोटालों को रोकना आसान हो सके।
Published: May 3, 2026