दिल्ली के विवेक विहार में धुँधले ग्रिल और बंद छत से बन गया आग‑भयावह जाल, 9 मौतें
दिल्ली के उत्तरी क्षेत्र में स्थित विवेक विहार एप्पार्टमेंट कॉम्प्लेक्स के चार‑मुंखी इमारत में प्रातःकालीन 02:30 बजे एक तेज़ धुआँ फूट पड़ा। अनुमानित कारण शॉर्ट‑सर्किट बताया जा रहा है, परंतु आग की तीव्र गति और बचाव में आई बाधाएँ इस दुर्दशा को और कठोर बना गईं।
इमारत की खिड़कियों पर स्थापित लोहे के ग्रिल, जो मूलतः सुरक्षा हेतु लगाए गए थे, आग लगते ही बचाव दल की पहुँच को रोकने लगे। वहीँ छत को दरवाज़े की तरह बंद कर रखा गया था, जिससे फर्श‑से‑फर्श बहाली की संभावनाएँ समाप्त हो गईं। परिणामस्वरूप, 24 घनघोर इन्सान में से 9 निवासी धधकते धुएँ में फँसकर अपनी जान गंवा बैठे, जबकि 15 को आग‑निगरानी दल ने समय पर बाहर निकाल पाया।
दिल्ली अग्निशमन विभाग ने बताया कि शुरुआती घंटों में पेट्रोल और अवरोधित निकासों के कारण फायर फाइटर टीम को इमारत के अंदर फंसे लोगों तक पहुँचने में काफी कठिनाई हुई। “ग्रिल और बंद छत ने ऐसा जाल बना दिया, जिससे हमारे कर्मियों को ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी घातक चुनौतियों का सामना करना पड़ा,” एक अधिकारी ने कहा।
नगर निगम के भवन निरीक्षण अधिकारी इस घटना के बाद तत्काल अंतःस्थापना जांच शुरू कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण नियमों के उल्लंघन – विशेषकर आपातकालीन निकास न होना, सुरक्षित फ्रेमवर्क का अभाव और अवैध ग्रिल का प्रयोग – इस त्रासदी के प्रमुख कारण हैं। स्थानीय प्रशासन ने संभावित दण्डात्मक कार्रवाई का संकेत देते हुए कहा कि दोषी ठहराए गए ठेकेदार और प्लान समीक्षक दोनों को विधिक प्रक्रिया के तहत लाया जाएगा।
वहीं निवासी संघों ने कहा कि ऐसी सुरक्षा खामियों को रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और रहस्य‑भेदक नीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने नगर पालिका से उमंगभरे आश्वासन निकाले हैं, जो इस वर्ष कई आवासीय प्रोजेक्ट्स में ‘आग‑सुरक्षा प्रमाणपत्र’ को अनिवार्य करने का प्रस्ताव दे रहा है।
समग्र रूप में यह घटना न केवल व्यक्तिगत त्रासदी को उजागर करती है, बल्कि नगर नियोजन, निर्माण मानकों और आपदा प्रबंधन के बीच खड़े अंतराल को भी स्पष्ट करती है। जब सुरक्षा उपाय खुद इमारत को ‘मृत्यू बिंदु’ में बदल दें, तो प्रशासनिक संगठनों की ‘नियम‑पारदर्शिता’ की कसौटी और अधिक कठोर हो जाती है।
Published: May 3, 2026