दिल्ली कोर्ट ने अभिजीत इयर मिश्रा के खिलाफ FIR पर रोक दी
दिल्ली के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरूषोत्तम पाठक ने 4 मई को अभिजीत इयर मिश्रा द्वारा महिलाओं पत्रकारों को अपमानजनक पोस्ट करने के संदेह में दर्ज किए जाने वाले एफआईआर पर स्थगन आदेश सुनाया। यह कदम बर्. 23 को एक मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए आदेश की मांग पर आया, जिसमें अभियुक्त को तत्काल पुलिस फाइलिंग का निर्देश दिया गया था।
मित्र, जो सोशल मीडिया पर महिला पत्रकारों के पेशेवर कार्य को लेकर असिंज लेख लिखते रहे थे, ने इस आदेश को चुनौती देते हुए न्यायालय में स्थगन की याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने दावा किया कि उनके अभिव्यक्ति की आज़ादी का उल्लंघन हो रहा है और FIR की प्रक्रिया में राजनीतिक दबाव और मीडिया मंडली के अति-प्रतिक्रिया का अनुप्रयोग हो रहा है।
इस मामले में मुख्य दायित्व दिल्ली पुलिस, अतिरिक्त सत्र न्यायालय और स्थानीय प्रशासन का है। पुलिस ने पत्रकार संघ की शिकायत पर प्रारम्भिक जांच शुरू की और मजिस्ट्रेट को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। न्यायालयीय स्थगन आदेश के बाद पुलिस को अब औपचारिक रूप से मामला दर्ज करने से रोक दिया गया, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में अनिश्चितता बनी रहती है।
समाचार कार्यकर्ताओं एवं नागरिक समाज के लिए यह निर्णय दोधारी तलवार बनकर सामने आया है। एक ओर यह अभिव्यक्ति की सीमा के बारे में चर्चा को उजागर करता है, तो दूसरी ओर यह दर्शाता है कि अनुचित सामग्री पर तुरंत कार्रवाई के बजाय कानूनी जाँच में देरी हो सकती है, जिससे दंडात्मक उपायों का प्रभाव कम हो सकता है।
स्थगन आदेश के प्रभाव को देखते हुए, कई महिला पत्रकारों ने प्रश्न उठाया है कि क्या भविष्य में समान अपमानजनक अभिव्यक्तियों पर त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी। इस मामले ने प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया की त्वरितता पर भी प्रकाश डाला, जहाँ प्रतिवादी के सामाजिक स्थिति को देख कर प्रक्रिया में देर हो सकती है, यह एक व्यंग्यात्मक तथ्य बन गया है।
आगे की कार्यवाही अभी जारी है, और दिल्ली की न्यायिक संस्थाएं इस संवेदनशील मुद्दे को किस दिशा में ले जाएँगी, यह देखना बाकी है।
Published: May 4, 2026