ड्रीम प्रोजेक्ट: यू‑17 फुटबॉल टीम की विश्व कप दौड़ में शहर की प्रशासनिक कमियों का असर
राष्ट्रीय खेल मंत्रालय ने हालिया घोषणा में ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ के तहत भारत के यू‑17 फुटबॉल टीम को विश्व कप 2027 के लिये तैयार करने की योजना पेश की। पाँच प्रमुख शहरी केंद्रों में 500 करोड़ रुपये का निवेश करके खेल‑आधारित बुनियादी ढांचा तैयार करने का लक्ष्य रखा गया, जिसमें राजस्थानी शहर जयपुर को प्रारम्भिक लाभांश प्रदान किया गया।
प्रशासनिक दस्तावेज़ों के अनुसार, जयपुर के ‘शौर्य फुटबॉल अकादमी’ के निर्माण कार्य को दो साल भीतर पूरा करने का वादा किया गया था। तथापि, प्रारम्भिक चरण में ही कई असामान्य बाधाएँ सामने आईं। निर्माण सामग्री की आपूर्ति में अनावश्यक देरी, बिजली कटौती और जल उपलब्धता की समस्या ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को गंभीर रूप से प्रभावित किया। स्थानीय क्लबों ने बताया कि युवा खिलाड़ियों को कभी‑कभी बिना पानी के दो घंटे तक अभ्यास करना पड़ता है, जबकि एयर‑कंडीशनिंग वाले इनडोर पिच पर गर्मी की मार से सुरक्षा जोखिम बढ़ गया।
संबंधित नगर निगम के अधिकारियों ने यह कहा कि बजट में कटौती नहीं हुई, बल्कि कार्य‑प्रक्रिया में “उच्चस्तरीय मंजूरी” में अटकाव है। यह टिप्पणी बीते महीने के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुनी गई, जहाँ पत्रकारों ने परियोजना की समय‑सीमा पर सवाल उठाए थे। नागरिक संगठनों ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “विज्ञान‑आधारित योजना बनाइए, न कि कागज‑पर‑तैयारकी” और मांग की कि सार्वजनिक निकायों की जवाबदेही को स्पष्ट किया जाए।
दूसरी ओर, फुटबॉल संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे राष्ट्रीय चयन प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होने देंगे और खिलाड़ियों की पढ़ाई‑लिखाई साथ-साथ चलाने के लिये अतिरिक्त शैक्षणिक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि प्रशासनिक अड़चनें बनी रहती हैं तो चयन निकाय को अन्य शहरों में वैकल्पिक अभ्यास स्थल तलाशना पड़ेगा, जिससे ड्रीम प्रोजेक्ट की मूल भावना—“समान अवसर, समान मंच”—खतरे में पड़ सकती है।
इस मध्यस्थता में, स्थानीय निवासियों की राय मिश्रित है। जबकि कुछ युवा खेल प्रेमी नई सुविधाओं की उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो अन्य नागरिकों ने कहा कि “बुनियादी सेवाओं की दखल के बिना बड़े‑पैमाने पर खेल‑परियोजनाएँ नहीं चल सकती”। इस प्रकार, ड्रीम प्रोजेक्ट की सफलता केवल कोचिंग स्टाफ या खिलाड़ियों की कुशलता पर नहीं, बल्कि नगर प्रशासन के निरंतर समर्थन, पारदर्शी कार्यान्वयन और समय पर बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता पर निर्भर करती है।
यदि नगर निगम और खेल मंत्रालय इस अस्थायी ‘अस्थिरता’ को दूर कर सके, तो भारत के यू‑17 टीम को विश्व कप में एक दुर्लभ जगह दिलाने की संभावना में वृद्धि होगी। अन्यथा, ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ एक और उल्लेखनीय सार्वजनिक‑निवेश की कहानी बन सकता है, जिसमें सपनों के साथ‑साथ प्रशासनिक देरी की कड़वी हकीकत भी सम्मिलित होगी।
Published: May 6, 2026