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डुमा में 60 वर्षीय मैराथन धावक पर कुत्ते का हमला, प्राधिकरण की कुत्ता‑नियंत्रण योजना पर सवाल

डुमा नगर परिषद के प्रमुख रिवर स्ट्रीट पर सुबह 6 बजे जॉगिंग करते हुए 60‑वर्षीय अनुभवी मैराथन धावक राजेश वैद्यानिक को एक कुत्ते द्वारा अचानक हमला महसूस कराना पड़ा। स्थानीय पुलिस के अनुसार, कुत्ता बिना मालिक के भटकते हुए उस क्षेत्र में कई सप्ताह से देखा जा रहा था, परंतु नगर विकास विभाग ने उसे अनौपचारिक रूप से ‘फ्री‑रैंडम’ के रूप में वर्गीकृत कर कार्रवाई नहीं की।

घटना के बाद राजेश ने तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केन्द्र में इलाज करवाया। चोटें मामूली थीं—कुल्हे पर खरोंच और पैर में हल्की चकत्ते—परंतु उनका शारीरिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव उल्लेखनीय है। धावक ने कहा, “मुझे रोज़ की ट्रेनिंग में सुरक्षा का भरोसा नहीं रहा, अब मुझे फिर से जूँघना कठिन लग रहा है।”

डुमा पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर कुत्ते की पहचान हेतु मुकदमा दर्ज किया। पुलिस अधिकारी रवि सिंह ने कहा, “हमने कुत्ते को पिंजरे में बंद किया है और उसके मालिक की तलाश में हैं। यदि मालिक नहीं मिला तो कुत्ते को humane इज़रायली परीक्षण के तहत निस्तारण किया जाएगा।”

दूसरी ओर, नगर परिषद के स्वास्थ्य एवं स्वच्छता अधिकारी सीमा रॉय ने कहा, “शहर में आज तक 1,800 से अधिक निशानदेह कुत्ते पंजीकृत हैं, लेकिन बजट सीमाओं के कारण एंटीसिपेटिक ट्रीटमेंट और मालकी पहचान कार्यक्रम में बाधा आती है। हमें अब गंभीर पुनरावलोकन करना होगा।”

स्थानीय नागरिक समूह ‘डुमा पर्यावरण मित्र’ ने इस मौके का फायदा उठाते हुए कुत्ता‑नियंत्रण की मौजूदा नीतियों की ‘धुंधली छाया’ पर तीखा व्यंग्य किया: “जब तक नगर परिषद को कुत्ते के खाने‑पीने के लिए ‘स्मार्ट फ़ूड डिस्ट्रीब्यूशन’ नहीं मिलता, तब तक किरेडविहारियों से तकलीफ़ ही होगी।” समूह ने एक पिटीशन शुरू कर 10,000 हस्ताक्षर जमा करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें कुत्ता‑पंजा, टीकाकरण और प्रतिक्रिया समय को 24 घंटे के भीतर सीमित करने की मांग की गई है।

इसी बीच, राजेश वैद्यानिक ने इस घटना को “एक चेतावनी” कहा, जिससे न केवल धावकों को बल्कि सभी सार्वजनिक व्यायाम‑स्थलों को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने एक छोटे स्तर पर सामुदायिक जागरूकता सभा का आयोजन भी किया, जिसमें स्थानीय डॉक्टर ने बुनियादी प्रथम‑चिकित्सा कौशल पर लघु प्रशिक्षण दिया।

डुमा में कुत्ता‑नियंत्रण की असफलता अब स्पष्ट रूप से सार्वजनिक सुरक्षा के एक बड़े मुद्दे के रूप में उभर कर सामने आई है। शहरी प्रबंधन के इस ‘सूखे दायरे’ में अब नीतियों के पुनः मूल्यांकन, बजट पुनः आवंटन और नागरिक सहभागिता के ठोस उपायों की आवश्यकता है, वरना अगली बार अनुमानित ‘धावकों के साथ दौड़ते कुत्ते’ को रोकने में केवल कुत्ते‑ट्रैकिंग ऐप ही मददगार रह सकता है।

Published: May 5, 2026