डिडी की बांध, टीएमसी का कवच नहीं बन सकी: विरोधी-प्रचलन ने बढ़ाई लहर
पश्चिम बंगाल में गृहिणी से लेकर किसान तक, कई वर्गों के लोग अब यह प्रश्न करने लगे हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा उद्घाटित डिडी बांध वास्तव में मतदाता-प्रेशर का निराकरण क्यों नहीं बन पाई। इस वर्ष के विधानसभा चुनाव के आधे साल पहले शुरू हुई इस परियोजना, जिसका प्रमुख लक्ष्य जलसंकट का समाधान और जल‑विद्युत उत्पादन था, अब विरोधी-प्रचलन की तेज़ लहर के सामने झुका हुआ प्रतीत होता है।
बांध के निर्माण को तत्कालीन सरकार ने "जनकल्याण का प्रतीक" कह कर प्रचारित किया था। कहा गया था कि निरंतर बाढ़‑प्रभावित जिलों—मुरशिदाबाद, बिर्बूम, होगली—में जल‑निकासी और सिंचाई के नए अवसर पैदा होंगे। लेकिन निर्माण के बाद के पहले तीन महीनों में ही कई नदियों के प्रवाह में बाधा उत्पन्न हुई, जिससे बाढ़‑प्रभावित क्षेत्रों में जल‑जमाव और फसल क्षति बढ़ी। प्रभावित ग्रामीणों ने दावा किया कि उन्हें न केवल पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला, बल्कि पुनर्वास योजना भी धुंधली रही।
इसी बीच, विपक्षी दलों—भाजपा, लोहा, और लोकतांत्रिक वाम दल—ने इस मुद्दे को अपने अभियान का हिस्सा बनाया। उन्होंने टीएमसी की शासनशैली को "बढ़ते दबाव में ढहती बंधी" के रूप में दर्शाया, जिससे विरोधी भावनाओं को और भी प्रज्वलित किया। सोशल‑मीडिया पर निकली कई टिप्पणियों में यह कहा गया कि "बांध तो बना, पर मतभेदों को रोक नहीं सकी"।
प्रशासन की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत नीरस रही। विभागीय अधिकारी ने कहा कि बांध का संचालन अब तक के आँकड़ों के अनुसार "सुरक्षित" है और उन पर प्रभावी निगरानी जारी रहेगी। अतिरिक्त रूप से, उन्होंने जल्द ही पुनर्वास एवं क्षतिपूर्ति के लिए एक वैधानिक समिति गठित करने का वचन दिया, पर इस वॉरंट के कागज़ी तौर‑तरीके से अब तक कोई ठोस कदम उठाया नहीं गया।
नागरिकों के सामने दो स्पष्ट प्रश्न उभरते हैं: क्या अधूरा बुनियादी ढाँचा जनता की समस्याओं को सुलझा सकता है, या यह सिर्फ चुनावी प्रचार की धँस नहीं? वर्तमान में विरोधी-प्रचलन की लहरें राज्य के कई पुस्ते (कार्यकीर्तियों) में तेज़ी से पकड़ बनाती दिख रही हैं, जिससे टीएमसी को अपनी नीति‑निर्धारण में पुनः‑समीक्षा करनी पड़ सकती है।
जब तक प्रशासन वैध समाधान नहीं प्रस्तुत करता, तब तक "डिडी की बांध" केवल एक प्रतीकात्मक स्मारक बनी रहेगी—जो जनता को याद दिलाएगा कि बड़े प्रोजेक्ट भी अगर लोगों की जुड़ाव को नज़रअंदाज़ करें, तो वह शक्ति का कावर नहीं बन पाते।
Published: May 4, 2026