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डीजीपी ने सोशियल मीडिया में उग्रवाद पर सख़्त रोकथाम का आदेश जारी किया
शहर के पुलिस विभाग के प्रमुख, डिप्टी एवरीजेंट जनरल (डीजीपी) रवि शंकर वर्मा ने कल रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उग्रवादी विचारधारा को सोशल मीडिया पर फैलाने वाले समूहों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम सार्वजनिक शांति और सामुदायिक एकता को बचाने की जरूरत से लिया गया है।
वर्तमान में स्थानीय प्रशासन ने एक सात-क़दम वाली कार्ययोजना तैयार की है, जिसमें ऑनलाइन निगरानी सॉफ़्टवेयर की तैनाती, विडियो और टेक्स्ट कंटेंट की स्वचालित फ़िल्टरिंग, और उल्लंघन करने वाले उपयोगकर्ताओं के खिलाफ तत्काल अकाउंट बंदी शामिल है। इसमें किसी भी मंच पर 'हिंसात्मक' या 'अधूरा' सामग्री को पहचानते ही पुलिस को रिपोर्ट करने की व्यवस्था है।
नगर निगम की सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने बताया कि इस योजना से पहले उन्होंने प्रमुख सोशल प्लेटफ़ॉर्मों के साथ अस्थायी समझौते किए थे, जिससे इन प्लेटफ़ॉर्मों को स्थानीय आदेशों का पालन करना पड़ेगा। इस दौरान, निजी डेटा की सुरक्षा और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर सवाल उठाने वाले समूहों ने इस उपाय को ‘डिजिटल अधिकारों की घिसी हुई जेब’ के रूप में दर्ज किया।
वित्तीय सत्र में खर्च अनुमोदित करने वाले अधिकारी ने कहा कि इस पहल के लिये वार्षिक बजट में 2.5 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। अनिवार्य वित्तीय अनुशासन की यही ‘सारथि’ है, जहाँ हर 10 लाख रुपये पर एक तकनीकी विशेषज्ञ को नियुक्त किया जाएगा, यह सुनकर स्थानीय ट्रैफिक पुलिस ने कहा, “बहु‑स्तरीय निरीक्षण के बाद ही हमारे ट्रैफिक लाइटों की बत्ती घटेगी।”
नागरिक संगठनों ने इस कदम के प्रभावों पर बहस शुरू कर दी है। नागरिक अधिकार मंच की प्रवक्ता साक्षी राणियों ने कहा, “समझें, हमें उग्रता से लड़ना है, लेकिन यदि सभी बकवास को फिल्टर कर दिया जाए तो लोकतांत्रिक बहस का क्या रहेगा?” उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी ‘जैरो‑टॉलरेंस’ नीति से अक्सर असली समस्याओं की जगह छोटे‑छोटे बग़ैर‑स्पष्ट मुद्दों को ही सजा दी जाती है।
पुलिस ने इस बात पर जोर दिया कि ‘उग्रता’ की परिभाषा स्पष्ट रूप से तय की गई है और केवल हिंसा को भड़काने वाली सामग्री ही दंडनीय होगी। उन्होंने कहा, “अगर कोई नागरिक अपने पसंदीदा कचहरी वाले मीम को पोस्ट करता है, तो वह अबहिप्राय नहीं रहेगा।” यह टिप्पणी सुनकर ऑनलाइन उपभोक्ता मंच पर कई हँसी‑मजाक वाले मीम उभरे, लेकिन यह भी स्पष्ट करता है कि नज़रिया कितनी सीधी‑सरल है।
शहर में अभी तक इस आदेश की प्रभावशीलता पर कोई ठोस आँकड़ा नहीं है, पर प्रारम्भिक रिपोर्टों में कहा गया है कि कई खातों को पहले ही ब्लॉक कर दिया गया है। इस बीच, सामाजिक मंचों के उपयोगकर्ता अभी भी इस बात की जिज्ञासा रखे हुए हैं कि कब उनका ‘फॉलोअर’ भी ‘फॉल्ट’ में बदल सकता है।
निष्कर्षतः, डीजीपी द्वारा उठाया गया यह कदम सुरक्षा के नाम पर तकनीकी हस्तक्षेप का नया अध्याय खोलता है। यह देखना बाकी है कि यह ‘आक्रमण‑रोधी’ नीति व्यावहारिक रूप से कितनी सतह पर्यंत पहुँचेगी, और क्या यह नागरिकों के संचार अधिकारों को ‘सड़क की सफ़ाई’ की तरह सिर्फ सतह पर ही नहीं, बल्कि गहराई में भी साफ़‑सुथरा रखेगी।
Published: May 9, 2026