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डीईओ जांच में कांग्रेस कौंसिलर के स्कूल प्रमाणपत्र को मिला ‘जालसाज़ी’ का टैग

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में हालिया शिक्षा विभाग की जाँच में यह खुलासा हुआ कि नवनिर्वाचित कांग्रेस कौंसिलर अमन सिंह के अधिग्रहीत स्कूल लर्निंग सर्टिफ़िकेट (एल.सी.) में दस्तावेज़ीय जालसाज़ी पाई गई। यह पता चलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) सुरेश चोपड़ा ने तुरंत ही मामले को तहकीकात के तहत डाल दिया।

जांच के अंतर्गत एल.सी. पर मौजूद हस्ताक्षर, मोहर, तथा सीरियल नंबर की तफ़सील से पता चला कि यह दस्तावेज़ 2024 के एक अन्य स्कूल के मूल प्रमाणपत्र से बदल कर तैयार किया गया था। इस तथ्य की पुष्टि करने के बाद डीईओ ने प्रतिकूल दिशा-निर्देश जारी किए, जिसमें संबंधित स्कूल को पंजीकरण रद्द करने और कौंसिलर को आगे की किसी भी शैक्षिक लाभ से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान शामिल है।

शहर के नागरिकों ने इस घटना पर गहरा निराशा व्यक्त की। एक स्थानीय अभिभावक, जिन्होंने अनाम रहना चाहा, ने कहा, "जब चुनावी जीत के साथ शैक्षणिक दस्तावेज़ भी ‘खरीदे’ जा सकते हैं, तो आम जनता का भरोसा कैसे बचा रहेगा?" ऐसे ही कई घरों में यह सवाल गूँज रहा है कि क्या लोकतांत्रिक प्रक्रिया में शिक्षा का व्यावसायीकरण सामान्य हो रहा है।

नगर परिषद ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस प्रकार के अनुचित प्रयोग को रोकने के लिए कड़ी निगरानी व्यवस्था स्थापित करेगा। परिषद अध्यक्ष विजय वर्मा ने कहा, "सुविधा के नाम पर किसी भी प्रकार की फर्जी दस्तावेज़ीकरण को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे; यदि आवश्यक हो तो कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।"

वहीं, राज्य शिक्षा विभाग ने इस प्रकरण को "शिक्षा के क्षेत्र में गलत प्रयोग की एक गंभीर उदाहरण" कहा और सभी नगर परिषदों को समान जांच हेतु निर्देश जारी किए। विभाग का कहना है कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए एल.सी. जारी करने की प्रक्रिया में बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य किया जाएगा।

पिछले कुछ महीनों में कई ऐसे ही दस्तावेज़ी विवाद सामने आए हैं, पर इस बार फलस्वरूप सरकारी कार्रवाई तेज़ी से शुरू हुई है। यह घटना स्थानीय प्रशासन को न केवल कड़ी निगरानी बल्कि राजनीतिक हस्तक्षेप को सीमित करने की आवश्यकता का भी इशारा देती है।

हालांकि अभी तक अमन सिंह पर कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हुआ है, पर उनके खिलाफ शैक्षणिक लाभों को स्थगित करने का प्रस्ताव मजबूत समर्थन पा चुका है। यह देखना बाकी है कि भविष्य में इस प्रकार की जालसाज़ी को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे, और क्या नगर परिषद की कार्यवाही जनता के भरोसे को पुनर्स्थापित कर पाएगी।

Published: May 5, 2026