ठेकेदारों ने पीडब्ल्यूडी के करोड़ों रुपये के बकाया को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की
राज्य सार्वजनिक कार्य विभाग (PWD) पर निवासियों और व्यावसायिक निकायों के बीच कई बड़े निर्माण परियोजनाओं के भुगतान में देरी के कारण गंभीर आरोप लगे हैं। कई ठेकेदारों ने बताया कि विभाग ने अब तक लगभग २०७ करोड़ रुपये के बिलों को साफ़ नहीं किया है, जिससे न केवल उनके वित्तीय दायरे पर असर पड़ा है बल्कि योजनाबद्ध सड़क, पुल और जल निकासी कार्यों में भी अनिवार्य रोक लगा है।
आवेदन दायर करने वाले ठेकेदारों ने कहा कि उन्होंने कार्य समाप्त कर सभी आवश्यक मानकों के अनुसार दस्तावेज़ प्रस्तुत कर लिए थे, परंतु विभाग द्वारा जारी भुगतान आदेशों में लगातार अनावश्यक देरी और बार‑बार की जाने वाली तकनीकी जांचें प्रमुख बाधा बन गई हैं। इन त्रुटिपूर्ण प्रक्रियाओं को लेकर उन्होंने राज्य के वित्त विभाग और PWD के अधिकारियों को दस्तावेज़ी उत्तर देने का कई महीनों तक आग्रह किया, परन्तु अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
भुगतान में इस व्यवधान के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप कई सार्वजनिक‑उपयोगी परियोजनाओं को रोकना पड़ा है। लंबित सड़कों की मरम्मत, निचले‑स्तर के जल निकासी प्रणाली के विस्तार और स्कूलों की इमारतों के नवीनीकरण कार्यों में देरी से नगरवासियों को रोज़मर्रा की असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में जाम और जलभराव की शिकायतें बढ़ी हैं, जिससे स्थानीय व्यापारियों और छात्रों पर अतिरिक्त बोझ आया है।
पीडब्ल्यूडी ने उत्तर में कहा कि मौजूदा देरी का मुख्य कारण बजट आवंटन में असंगतियों और कई बार तकनीकी मानदंडों की पुनः जाँच है, जिसे निकटतम वित्तीय वर्ष में हल किया जाएगा। विभाग ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के सामने प्रस्तुत दस्तावेज़ों की जाँच होने के बाद ही अंतिम भुगतान आदेश जारी किए जा सकेंगे। इस बीच, न्यायालय से तत्काल इंटरिम राहत की मांग की गई है, जिससे लंबित कार्यों को फिर से गति मिल सके।
उच्च न्यायालय के पास प्रस्तुत याचिका का परीक्षण अभी जारी है, परन्तु यह मामला यह स्पष्ट करता है कि सार्वजनिक‑निजी साझेदारियों में वित्तीय पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान की कमी से न केवल ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है, बल्कि नागरिकों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता भी खतरे में पड़ जाती है। प्रशासनिक प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता स्पष्ट है, अन्यथा ऐसे ही मामलों से शहर की विकास लहर क्षीण होती रहेगी।
Published: May 6, 2026