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Category: शहर

टीवीके के नवस्थापित प्रमुख विजय ने दोधारी सत्ता को हिला दिया, पर शहर की समस्याओं का हल नहीं मिला

दिसंबर में हुई नगरपालिका चुनावों में टी.वी.के (ट्रांसवेस्टी डेमोक्रेटिक) के नव-आगमन प्रमुख विजय ने तमिलनाडु की परम्परागत दोधारी राजनीति—ड्राविडियन डेमोक्रेटिक पार्टी (डीडीपी) और एआईएडब्ल्यू (अध्यार)—को गंभीर रूप से कमजोर कर दिया। मुख्य मंत्री कलक्टर (स्टालिन) और उनके कई प्रमुख मंत्रियों ने अपने अधिकांश मतदातवियों को खो दिया, जिससे कई महानगर परिषदों में नई गठबंधन का निर्माण हुआ।

विजय के आशाजनक रैली-भाषणों ने नागरिकों को परिवर्तन के आश्वासन दिलाए—पानी की ठीक‑ठाक आपूर्ति, कचरा निपटान में स्वच्छता, और अव्यवस्थित सड़कों का पुनर्वास। हालांकि, चुनाव जीतने के तुरंत बाद शहर प्रशासन ने इन वादों को ठोस कार्य‑योजना में बदला नहीं। नई गठबंधन के मौर्य (महापौर) ने बजट में थोड़ा बदलाव किया, पर बड़ी हिस्सेदारी अभी भी पुराने विभागीय प्रबंधकों के हाथों में रही।

इस बदलाव का प्रत्यक्ष असर चेन्नई के किंगस्टन एरिया में देखा गया, जहाँ पिछले साल लगातार पानी की कमी ने रहने वालों को सूखे दही जैसे ठंडे माहौल में डुबो दिया था। नई नगरपालिका ने त्वरित जल टैंक स्थापित करने की घोषणा की, पर दो महीने बाद भी वही टैंक खाली हुआ मिला। नागरिक समूहों ने सोशल मीडिया पर इशारा किया कि "राजनीति का मंच सज गया, पर नल के नीचे के रुई के धागे अभी भी जलेबी जैसा गंदा है।" यह सूखा व्यंग्य प्रशासन की कार्यक्षमता पर तेज़ टिप्पणी बन गया।

स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत प्रस्तावित ट्रैफिक नियंत्रण उपाय भी लम्बे समय तक अनुत्तरित रह गए। विजय ने शहरी सुधार को प्राथमिकता दी, पर वास्तविक कार्यान्वयन में पूंजी की कमी और पुरानी ब्यूरोक्रेटिक रुढ़ी का असर स्पष्ट रहा। कई एन्गेजमेंट मीटिंग्स में नागरिकों ने बताया कि सोमवार‑सोमवार शॉपिंग सेंटर में कचरा जमा होने से सड़कों का द्रव्यमान बढ़ रहा है, जबकि नई नगरपालिका ने इसे "पर्यावरण मित्रता" के झंडे तले टाल दिया।

विरुद्ध पक्ष, डीडीपी के वरिष्ठ अधिकारी, इस बारे में कहा कि "राजनीतिक धुंध में हम फँस नहीं सकते, जनता को वास्तविक सेवा प्रदान करना हमारा अटूट कर्तव्य है"। उनकी बात में कोई कली नहीं, पर पिछले पाँच वर्षों में तमिलनाडु की दो प्रमुख शहरों—चेन्नई और कोयम्बतूर—में सड़क पक्कीकरण, बायो‑डाइजेस्टर लगाना, और सार्वजनिक शौचालय निर्माण की प्रगति धीमी रही।

संक्षेप में, विजय की आश्चर्यजनक जीत ने तमिलनाडु की दोधारी सत्ता को राजनीतिक रूप से हिला दिया, पर नागरिकों को शहर के बुनियादी ढाँचे में वास्तविक सुधार का एहसास अभी तक नहीं मिला। यह संकेत देता है कि टर्नओवर केवल तालिका पर असर डालता है; सेवा‑डिलीवरी की वास्तविकता के बिना, चुनावी जीत का जश्न केवल एक हीरोशिप की थाली बनी रहती है।

Published: May 5, 2026