जयपुर में 'मीट' कार्यक्रम में देवराशी नारद की संचार परंपरा पर चर्चा
राजस्थान की राजधानी जयपुर में 2 मई को नगर निगम द्वारा आयोजित सांस्कृतिक‑शैक्षणिक मंच ‘मीट’ ने भारतीय प्राचीन संचार सिद्धान्तों के एक प्रमुख पौराणिक व्यक्ति – देवराशी नारद – पर विस्तृत विमर्श का आयोजन किया। कार्यक्रम में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफ़ेसर डॉ. चंद्रभाई शौकी, भारतीय संचार समिति के अध्यक्ष अजय मिश्रा, तथा नगर निगम के सामाजिक‑सांस्कृतिक शाखा के अधिकारी राजेश सिंह ने मुख्य भाषण दिया।
मुख्य बात‑चर्चा में नारद के ‘विचार‑विनिमय’ और ‘वस्तु‑परिचय’ के मौखिक रूपांतरण को आधुनिक संचार तंत्र, विशेषकर शहरी सूचना‑प्रसार और सार्वजनिक सेवाओं के डिजिटलीकरण से जोड़ने पर केंद्रित था। डॉ. शौकी ने कहा, “नारद ने संवाद को द्वि‑आयामी रूप में देखा; आज के तेज‑गति वाले शहरी परिदृश्य में यह सिद्धांत हमारे नागरिक‑सेवा पोर्टल और जल‑सूचना प्रणाली में प्रतिच्छेदित हो सकता है।”
नगर प्रशासन ने इस मंच को स्थानीय संस्कृति को सुदृढ़ करने व सरकारी सूचना‑प्रसारण की पारदर्शिता बढ़ाने के एक साधन के रूप में प्रस्तुत किया। आयुक्त विकास सिंह ने कार्यक्रम के अंत में एक प्रस्ताव रखा कि नारद की परम्परागत संचार तत्त्वों को ‘स्मार्ट सिटी’ परियोजनाओं में एम्बेड किया जाए, जैसे कि ट्रैफिक‑नियंत्रण सेंटर में “सुधार‑संवाद” मॉड्यूल का प्रयोग।
हालाँकि, इस पहल पर कुछ नागरिक समूहों ने टिका‑टिप्पणी की। सार्वजनिक आवास‑समाज के अध्यक्ष राधिका मेहता ने कहा, “सांस्कृतिक पुनरुज्जीवन सराहनीय है, पर जब बजट में कमियों से पानी की पाइपलाइन ठीक नहीं हो पाती, तो ऐसी शैक्षणिक कार्यक्रमों को प्राथमिकता देना प्रशासनिक असंगति को उजागर करता है।” इस पर नगरपालिका अधिकारी राजेश सिंह ने बताया कि इस वर्ष के सांस्कृतिक खंड में 15 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो कुल विकास बजट का 2 % से कम है, और इसका उद्देश्य सामाजिक सहभागिता के साथ‑साथ शहरी प्रशासन की प्रभावशीलता बढ़ाना है।
कार्यक्रम का निष्कर्ष यह रहा कि देवराशी नारद के संचार सिद्धान्तों को डिजिटल शहरी प्रणालियों में समावेश करने के लिए एक कार्य‑समूह का गठन किया जाएगा। इस समूह में शहरी योजना विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, तथा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ शामिल रहेंगे, और अगले त्रैमास में शुरुआती रूपरेखा प्रस्तुत करने का लक्ष्य रखा गया है।
‘मीट’ कार्यक्रम ने सांस्कृतिक‑शैक्षणिक संवाद को शहरी प्रशासन के साथ जोड़ने का नया प्रयोग प्रस्तुत किया, पर इसका वास्तविक प्रभाव तभी परखा जाएगा जब नागरिक‑सेवा बुनियादी ढाँचे की मौजूदा चुनौतियों को समान रूप से संबोधित किया जाएगा।
Published: May 5, 2026