जम्मू‑कश्मीर निवासी की मौत, दीग में बेटे की शादी को लेकर हुई हिंसा
राजस्थान के भरतपुर ज़िले के दीग शहर में 45 वर्षीय अहमद निरवानी, जो मौजूदा में जम्मू‑कश्मीर के शिनियर शहर से आते थे, अपने बेटे की बिना परिवारिक स्वीकृति वाली शादी को लेकर स्थानीय विरोध के बीच घातक परिणाम का शिकार हुए। नौ अवरुद्ध साक्ष्य और कई गवाहों के अनुसार, निरवानी ने अपने बेटे को एक स्थानीय लड़की से विवाह करने के लिए दीग लाया था, जिससे गांव में तेज़ असंतोष उत्पन्न हुआ।
गांव के कुछ बुजुर्गों ने इस रिश्ते को “परम्परा का उल्लंघन” कहा और निरवानी पर दबाव डालना शुरू किया। जब स्थिति बिगड़ती दिखी, तो स्थानीय युवाओं के एक समूह ने निरवानी को मारपीट की; अंत में उन्हें लंदन के फावड़े से कई बार घायल किया गया और तुरंत बाद लाश निकटवर्ती अस्पताल में ले जानी पड़ी, जहाँ उनका निधन हो गया।
पुलिस ने घटना के बाद दो घंटे के भीतर मामला दर्ज किया, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों में पुलिस ठहराव को ‘काफी देर’ बताया गया। तत्काल नियंत्रण के उपाय के रूप में दीग में दो दिन तक कड़ी पाबंदी लागू की गई, जो स्थानीय व्यापारियों और यात्रियों को असहज कर गई। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को कुल 5 लाख रुपये की एकमुश्त मुआवजा राशि प्रदान करने का वचन दिया, साथ ही घटना स्थल की सुरक्षा हेतु निगरानी कैमरों की स्थापना का आदेश जारी किया।
निरवानी के रिश्तेदारों ने कहा कि उन्हें पहले ही स्थानीय प्रशासन से रिश्ते के लिए अनुमति माँगने का कोई प्रावधान नहीं बताया गया था, जबकि उन्होंने एक अनौपचारिक साधन से ऐसे मामलों में मध्यस्थता की आशा की थी। इस अधूरी व्यवस्था ने न केवल सामाजिक तनाव को बढ़ाया, बल्कि क़ानूनी प्रक्रिया के उचित पालन में भी चूक को उजागर किया।
ऐसी घटनाएँ अक्सर छोटे शहरों में “परम्परागत संघर्ष” के रूप में छुप जाती हैं, जबकि असली समस्या प्रशासनिक अनुत्तरदायित्व और पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया के अभाव में निहित है। स्थानीय अधिकारी अब इस बात पर गंभीर चर्चा कर रहे हैं कि भविष्य में सामुदायिक विवादों के समाधान हेतु एक प्रॉक्सी मध्यस्थता निकाय का गठन किया जाए, जिससे किसी भी प्रकार की हिंसा को रोका जा सके।
Published: May 3, 2026