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Category: शहर

जिला स्वास्थ्य टीम ने 3 साल के बच्चे के दिमाग से 8 सेमी की टहनी निकाली, प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

रजि. वार्ड 12‑में स्थित सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने आज एक अभूतपूर्व शल्यक्रिया पूरी की: 3‑वर्षीय बच्चा अनभिज्ञता में 8 सेमी लंबी टहनी अपने दिमाग में धँस चुका था। यह रोग‑रहित वस्तु, जो मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार एक छोटे मलबे की टहनी थी, बायसनस नली के माध्यम से निकाली गई।

आरोप यह है कि बच्चे का प्रारम्भिक लक्षण – बार‑बार सिर दर्द, खिंचाव और उल्टी – के बाद भी नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ने उचित रे‑फरेंस नहीं किया। अंततः, मां ने निजी क्लिनिक से संपर्क किया, जहाँ तेज‑गति वाले सीटी स्कैन ने टहनी की मौजूदगी स्पष्ट कर दी। यह घटना स्थानीय प्रशासन के आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था की तत्परता पर प्रकाश डालती है।

नगर निगम के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख ने कहा, “हमारी प्राथमिक स्वास्थ्य इकाइयों को प्रारम्भिक निदान में प्रशिक्षित किया जा रहा है, परन्तु अति‑विलंबित रे‑फरेंस की जिम्मेदारी प्रणालीगत है, न कि व्यक्तिगत।” इस बयान में सूक्ष्म व्यंग्य छुपा है: मौजूदा प्रोटोकॉल में ‘प्राथमिक देखभाल’ शब्द की परिभाषा अक्सर ‘देखो, फिर सोचो’ तक सीमित रहती है।

शहर के अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त एम्बुलेंस और टेली‑मेडिसिन लिंक स्थापित करने की योजना घोषित की, लेकिन बजट कटौतियों और उपकरणों के अभाव के कारण कार्यान्वयन में देरी का जोखिम बना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी आपदाओं से निपटने के लिये न केवल तेज‑गति वाले इमेजिंग यंत्र बल्कि सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम भी आवश्यक हैं।

स्थानीय निवासी, जो अक्सर अस्पष्ट स्वास्थ्य संकेतों को ‘आँखों की सूजन’ समझ देते हैं, अब इस घटना से सीख लेकर शारीरिक परीक्षण में सतर्कता बढ़ाने का इरादा जताते हैं। परन्तु सवाल यह बना रहता है—क्या नगरपालिका की ‘स्वास्थ्य सुरक्षा’ के वादे केवल कागज़ी वाक्यांश हैं या वाकई में सड़कों के कोने‑कोने तक पहुँचेंगे?

Published: May 5, 2026