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जिला न्यायाधीश ने राष्ट्रीय लोकअदालत जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया

दिल्ली के जिला न्यायालय में कल सुबह, जिला न्यायाधीश श्री राजेश कुमार ने राष्ट्रीय लोकअदालत (National Lok Adalat) के बारे में जनजागरूकता अभियान का आधिकारिक शिथिलन किया। यह पहल, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (State Legal Services Authority) के सहयोग से, लंबित दीवानी‑वाणिज्यिक मामलों को शीघ्र निपटाने तथा मुकदमेबाज़ी के बोझ को कम करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।

समारोह में न्यायालय के मुख्यालय के परिसर में लगे पोस्टर, ब्रोशर और मोबाइल सूचना बूथों के माध्यम से जनता को नि:शुल्क न्याय सुविधाओं, पारिवारिक विवादों, उपभोक्ता मामलों और ऋण-संबंधी दावों के निवारण हेतु लोकअदालत की प्रक्रियाओं से रूबरू कराया गया। न्यायाधीश ने कहा, "लोकअदालत के माध्यम से छोटे‑पैमाने के विवादों को तेज़ी से सुलझाकर, न्यायपालिकाओं की लटकी हुई फाइलों को घटाना हमारा कर्तव्य है।"

वहीं, प्रशासनिक स्तर पर स्थानीय अदालत ने इस अभियान को दो सप्ताह तक चलाने की योजना बनाई है, जिसमें ग्राम-स्तर के पंजीकरण केंद्रों और शहरी बुनियादी ढाँचे पर विशेष सूचना सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह कदम, पिछले पाँच वर्षों में भारत के न्यायिक बैकलॉग में 2.3 करोड़ से अधिक मामलों की वृद्धि को देखते हुए, एक ‘सऊदी’ उपाय के रूप में दिखाया जा रहा है।

नागरिकों के बीच प्रतिक्रिया मिली-जा रही है। कई छोटे व्यापारियों ने बताया कि उन्होंने पहले लोकअदालत के बारे में सिर्फ अफवाहें सुनी थीं, जबकि इस अभियान ने उन्हें पहला प्रमाणिक स्रोत प्रदान किया। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता श्मिता अग्रवाल ने टिप्पणी की, "जागरूकता अभियान एक अच्छा प्रयास है, पर असली सवाल यह है कि अनियमित रिकॉर्ड‑रखरखाव, कम प्रशिक्षण वाले मध्यस्थ और अनौपचारिक प्रक्रियाएँ दीर्घकालिक समाधान में कितनी मददगार होंगी।"

इतिहास में देखे तो, राष्ट्रीय लोकअदालत का पहला संस्करण 2000 में शुरू हुआ था, तब से यह वार्षिक रूप से लगभग 3 लाख मामलों को निपटाने में सफल रहा है। हालांकि, न्यायपालिका के आंकड़े दर्शाते हैं कि कुल लंबित मामलों की संख्या में केवल 5‑6 प्रतिशत ही इसमें हल हो पाते हैं, जिससे इस अभियान की व्यावहारिक उपयोगिता पर सवाल उठता है।

ऐसे में, जिला न्यायाधीश ने अभ्यर्थियों को याद दिलाया कि लोकअदालत केवल विकल्प है, न कि सबके लिये उपयुक्त समाधान। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जनता इस मंच पर सक्रिय रूप से भाग नहीं लेगी, तो इसका उद्देश्य केवल कागजी दस्तावेज़ में ही रहेगा।

सारांशतः, राष्ट्रीय लोकअदालत जागरूकता अभियान न्यायिक पहुंच को आसान बनाने की ओर एक सकारात्मक कदम है, पर इसकी सफलता अंतिम तौर पर प्रबंधन की निरंतरता, प्रक्रियात्मक पारदर्शिता और नागरिकों के सक्रिय सहयोग पर निर्भर करेगी।

Published: May 8, 2026