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जालंधर में बारिश ने गर्मी की मार से राहत दी, पर आम के किसान अभी भी चुनौतियों से जूझ रहे

जालंधर, 8 मई—पिछले कुछ हफ़्तों में लगातार दर्ज किए गए कोहरे‑भरे तापमान ने प्रदेश के प्रमुख निर्यात‑उत्पाद, आम, को संकट में धकेल दिया था। तापमान 44 °C तक पहुंचते ही कई बाग़ों में फूलों का प्रमोशन रुक गया, फल‑पकवान में धूप‑से‑सिकुड़न (sun‑scald) के संकेत दिखने लगे और किसान आमदनी में गिरावट की आशंका जताने लगे।

स्थानीय मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 3 मई से शाम‑शाम तक बिंदास हल्की बारिश ने 12 मिमी से 18 मिमी तक की वर्षा घड़ाई। यह बूँदबाँदी बाग़ीचों के लिए विज्ञापन‑विराम जैसी है – अस्थायी राहत, पर कुछ नई समस्याओं की ओर इशारा करती है।

जालंधर ज़िला कृषि विभाग ने तुरंत इस अवसर का फायदा उठाते हुए फसल‑रोग निवारण हेतु फफूंद‑नाशक स्प्रेिंग अभियान शुरू किया। विभाग के अधिकारी बताते हैं, “बारिश के बाद फफूंद रोगों का प्रकोप आमतौर पर तेज़ होता है; इसलिए हमने 5,000 हेक्टेयर में रासायनिक उपचार को तेज़ किया है।” हालांकि, किसान संगठनों ने कहा कि इस कदम के बावजूद जल‑निकासी की खराब व्यवस्था से बाग़ों में पानी भरना शुरू हो गया, जिससे जड़‑सड़न का खतरा बढ़ गया।

जालंधर नगर निगम, जो अक्सर जल‑संकट में फंसे बाग़ों के लिए जल‑स्रोत की व्यवस्था में लेंस-टोरिक (लेन्स‑टॉरक) कार्य करता आया है, ने इस बार केवल दो ही जल‑टैंक को खाली करके बाग़ों तक पानी पहुँचाने का वादा किया। परन्तु स्थानीय पत्रकारों के सर्वेक्षण से पता चला कि 70 % किसानों को अभी भी “पानी नहीं पहुँचा” की शिकायत है। यह प्रशासनिक अड़चन, कई लोगों का मानना है, पिछले साल के “आम‑बाग जल‑संकट” के वादे को आगे धकेल रही है।

विपरीत रूप में, नगर निगम के जल‑ऊर्जा अधिकारी संजीव शुक्ला ने टिप्पणी की, “बड़ी बारिश में बुनियादी ढांचे का बिखरना स्वाभाविक है; हम अगले महीने तक सभी निचे‑नालों की सफ़ाई करके जल‑जमाव को रोकेंगे।” यह वाक्यांश अक्सर मर्यादा के साथ “हल्का‑फुल्का” परीक्षार्थी के आश्वासन जैसा प्रतीत होता है, पर वास्तविक कार्यक्षमता के अभाव में यह सिर्फ़ कागज़ी अरसा ही बन जाता है।

आगे इस स्थिति को देखते हुए, जालंधर के प्रमुख राष्ट्रीय राजनैतिक प्रतिनिधि, सांसद शरद सिंह ने अपने क्षेत्रीय कार्यालय से “आधुनिक बाग़ीच‑जल‑प्रबंधन योजना” का प्रस्ताव रखा है। योजना में जल‑धरोहर निर्माण, सौर‑चालित जल‑पंप, तथा क्षतिग्रस्त जल‑नालों की नई पाईपलाइन शामिल है। लेकिन योजन के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक फंडिंग अभी भी “वित्तीय वर्ष के अंत तक तय होगा” के लूप में अटकी हुई है।

जालंधर के आम किसान, जिन्हें अक्सर “गर्मियों में धूप‑से‑सिकुड़न” की समस्या का सामना करना पड़ता है, अभी भी आशा और निराशा के मिश्रण में जी रहे हैं। “बारिश ने हमें एक साँस दी, पर फिर भी खेत में पानी जमा है; अब क्या करूँ?” एक 45‑वर्षीय किसान ने कहा।

समग्र रूप में, हल्की बारिश ने निश्चित रूप से क्षणिक राहत प्रदान की है, पर जल‑व्यवस्थापन, रोग‑निवारण, और प्रशासनिक तत्परता के मुद्दे अभी भी अधूरे हैं। यदि इन समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो अगले गर्मी‑मोह (heat‑wave) से जालंधर के आम‑उद्योग को फिर से गंभीर झटका लगने की संभावना बनी रहेगी।

Published: May 8, 2026