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जाए पवार ने कहा, मोआ अध्यक्ष पद को एनसीपी के पास ही रहना चाहिए

महाराष्ट्र ओलम्पिक एसोसिएशन (MOA) ने हाल ही में अपने अध्यक्ष पद पर एक बाहरी व्यक्ति को नियुक्त किया, जिससे राष्ट्रीयवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर गहरी असंतुष्टि उत्पन्न हुई। NCP के वरिष्ठ नेता जाए पवार ने इस कदम को ‘राजनीतिक अनुकूलन’ का उदाहरण कहते हुए कठोर शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि यह पद पारम्परिक रूप से पार्टी के भरोसेमंद मित्रों के पास ही रहा है और इसे ‘बदलाव की हवा’ में नहीं घुमाया जाना चाहिए।

पिछले दो दशक में MOA के अध्यक्ष पद पर NCP के कई वरिष्ठ सदस्य रहे हैं, जिन्होंने राज्य‑स्तरीय खेल विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। पवार का तर्क है कि नई नियुक्ति न केवल राजनीतिक संतुलन बिगाड़ती है, बल्कि खेल प्रशासन में पेशेवरता के मानदंडों को भी धुंधला करती है। उनका कहना है कि यदि अध्यक्ष का चयन योग्यता के आधार पर किया जाता, तो राज्य की खेल सुविधाओं में वर्तमान झंझट, जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी और वित्तीय पारदर्शिता की समस्या, का समाधान संभव होता।

राज्य खेल मंत्रालय ने अभी तक इस विवाद पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, पर मंत्रालय के एक मंतव्य व्यक्त करने वाले अधिकारी ने कहा कि अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन किया गया है। वहीं, स्थानीय खेल संगठनों ने इस निर्णय के कारण नियोजित प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में देरी की चेतावनी जारी की है। कई कोच और एथलीट इस बात पर आशंका जताते हैं कि प्रशासनिक उलझनों से उनके सहयोगी मंचों पर प्रभाव पड़ सकता है।

नए अध्यक्ष के विरुद्ध कानूनी दायरा भी खुल रहा है; कुछ पार्टी सदस्यों ने न्यायालय में याचिका दायर करने की घोषणा की है, जिसमें वे ‘पार्टी के हितों की रक्षा’ और ‘स्पोर्ट्स गवर्नेंस में पारदर्शिता’ का हवाला दे रहे हैं। इस बीच, नागरिक समाज विभिन्न मंचों पर इस बात पर प्रकाश डाल रहा है कि खेल संस्थाओं को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रख कर ही खिलाड़ियों के लिए सच्चा विकास संभव है।

जाए पवार की टिप्पणी ने स्थानीय राजनीति में एक बार फिर सत्ता‑संतुलन के सवाल को उठाया है। जबकि विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को ‘राजनीति का खेल’ कहकर खारिज किया, विशेषज्ञों का मानना है कि चाहे कौन भी अध्यक्ष बने, प्रणालीगत सुधारों के बिना खेल विकास में स्थायी प्रगति की उम्मीद कठिन ही रहेगी। इस प्रकार, MOA में इस बदलाव का असर न केवल पार्टी रैंकिंग पर, बल्कि महाराष्ट्र के एथलीटों के भविष्य पर भी गहरा हो सकता है।

Published: May 6, 2026