छोटा उदयपूर में बाघ के हमले से 7 साल की बच्ची की चोट, प्रशासनिक प्रतिक्रिया पर सवाल
गुजरात के छोटा उदयपूर जिले में 1 मई को एक बाघ ने 7 साल की बच्ची पर अचानक हमला कर उसे चीर‑फाड़ कर चोट पहुंचा दी। बच्ची अपने पिता के साथ गाँव के मैदान में खेल रही थी जब बाघ ने प्रहार किया। क्षण भर में उपस्थित ग्रामीणों ने घटना देख ली और तुरंत ही पुलिस को सूचित किया।
स्थानीय पुलिस ने एम्बुलेंस को तुरंत दुर्घटना स्थल पर पहुंचाया और घायल बच्ची को उदयपूर के जिलाकेंद्र अस्पताल में ले गया। अस्पताल की रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची की चोटें गंभीर परन्तु जीवन‑धमकी नहीं वाली थीं; प्राथमिक उपचार के बाद उसे स्थिर स्थिति में रखा गया। इलाज के दौरान बच्चे की माँ ने बताया कि बाघ के पीछे गाँव के शहरी विस्तार और जंगल के सीमांकन में गड़बड़ी का बड़ा हाथ हो सकता है।
घटना के पश्चात वन विभाग ने बाघ को ट्रैक करने के लिये ड्रोन और पॅट्रोल नऊका तैनात किए। दो दिन बाद बाघ को शांति से फँसाया गया और पुनः वन्य क्षेत्र में मुक्त किया गया। वन विभाग के वनविज्ञानी ने कहा, "बाघ का आवास उसके प्राकृतिक पर्यावरण में ही सुरक्षित रहता है; मानव‑वन्यजीव टकराव से बचने के लिये बाउंड्री फेंसिंग और सतत् निगरानी आवश्यक है।"
प्रशासनिक दृष्टिकोण से, नगर पंचायत ने तुरंत ही आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम और स्वास्थ्य अधिकारी को जोड़कर एक सामूहिक कार्य योजना तैयार की। हालांकि, कई नागरिकों ने कहा कि ऐसी स्थिति से बचने के लिये पहले से ही बाउंड्री की मरम्मत और जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाए गए थे। "जब बाघ गाँव के द्वार पर तैनात होते हैं, तो जिम्मेदारी सिर्फ 'तीन घंटे में रेफ़रेंस' देने की नहीं, बल्कि नियम‑कानूनों की कठोर पालना करवाने की भी है," एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की वन्यजीव प्रबंधन और शहरी नियोजन के बीच तालमेल पर प्रश्न उठाए हैं। आगे निकट भविष्य में जलवायु‑सुरक्षा समितियों के माध्यम से गाँव‑जंगली क्षेत्रों में सीमांकन के पुनर्नवीकरण, नियमित वनपट्रोल और नागरिकों के लिये बाघ-सुरक्षा कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इस बीच, प्रभावित परिवार को राज्य सरकार द्वारा आर्थिक सहायता सतह पर रखी गई है, और डॉक्टरों ने बच्ची के पूर्ण स्वास्थ्य लाभ की कामना की है।
Published: May 5, 2026