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Category: शहर

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चेन्नई में ग्रीष्मकाल में जानवरों के लिये जल‑भोजन व्यवस्था: दो संगठनों की छोटी मगर असरदार पहल

जाने‑माने चुभती धूप के साँसों में चेन्नई के कई बिल्लियों, कुत्तों और शहर के तेज़ी से उड़ने वाले पक्षियों को पानी‑प्यासी हालत का सामना करना पड़ रहा था। इस बीच, दो स्थानीय सामाजिक संगठनों ने सादगी से तैयार किये गये जल‑कटोरे और नारियल‑के-छिलके‑पर‑बनाए गये फ़ीडर को सार्वजनिक स्थानों पर रखकर दीन‑जनों की (अर्थात्, बेधड़क‑बिल्ली‑भेड़ियों की) मदद की।

पहले समूह ने १०० लिटर क्षमता वाले धातु‑कटोरे बनाकर प्रमुख बस्तियों, बाजारों और स्कूलों के करीब रखे। इनका उद्देश्य कुत्तों व बिल्लियों को दिन‑भर ठंडा पानी उपलब्ध कराना था, जहाँ पानी का सुचारु प्रवाह अक्सर नगर निगम के कवरेज से बाहर रहता है। दूसरे समूह ने खरीफ़ के चरम में पक्षियों के लिये नारियल के खोल में गुनगुना पानी और बीज डाल कर ‘फ़ीडर’ स्थापित किये। इस नूतन प्रयोग से झुंड‑भरे पेड़ों की छाया में चिड़ियों को सुगंधित स्नैक्स तथा हाइड्रेशन दोनों मिली।

इन दो प्रयासों की सराहना नगर निकाय के कुछ पदाधिकारियों ने भी कर ली, परन्तु उनके साथ ही यह प्रश्न बनकर सामने आया कि क्या शहर की मूलभूत बुनियादी संरचना – जैसे सार्वजनिक जल‑स्टेशनों का विस्तार और कूड़ा‑कचरा प्रबंधन – को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए। अक्सर यही बजट‑भरे ‘जल‑विकास’ के बहाने से छोटे‑छोटे कार्यो के लिये फंड नहीं मिल पाते, जबकि इन सरल उपायों से जीव‑जंतुओं के जीवन‑स्तर में तुरंत सुधार हो जाता है।

स्थानीय नागरिकों ने इन कदमों को “ताज़गी भरा सीधा‑सादा समाधान” कहा, परन्तु शहर के प्रबंधन पर लहराते आँसू नहीं, बल्कि सादे‑संदेह की लकीरें खिंच रही हैं। अगर नगर निगम हर गली‑कोने पर यह जल‑कटोरा रखता तो इन्हें “स्वस्थ्य‑सुरक्षा” के नाम से टाइप‑फेवर नहीं, बल्कि नियमित “पशु‑सहायता” के अधिनियम में बदलना पड़ेगा। अब समय आया कि न केवल एएनजीओ, बल्कि प्रशासनिक इकाइयाँ भी “जल‑भोजन” को अपनी वार्षिक योजना में स्पष्ट रूप से स्थान दें।

अभी के लिए, ठंडी पानी के कटोरे और नारियल‑शेल फ़ीडर ही इन सशक्त जीवों की तड़प को थामे हुए हैं। यह छोटा‑सा कदम शहर के वार्षिक जल‑संकट की बड़ी तस्वीर में एक संकेत देता है: जब प्रशासन “बड़े‑बड़े आंकड़े” की बात करता है, तो छोटे‑छोटे समाधान भी आवश्य‑क हों। ऐसी आशा है कि आगे चलकर अन्य सामाजिक समूह और नगर निकाय मिलकर व्यापक, टिकाऊ और वैज्ञानिक‑आधारित “शहरी जीव‑कल्याण” नीति बनाएँगे।

Published: May 9, 2026