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Category: शहर

चंडीगढ़ UT ने औद्योगिक भूमि को वाणिज्यिक उपयोग में बदलने पर रोक लगाई

चंडीगढ़ के संघीय प्रांत (UT) के विकास प्राधिकरण ने 5 मई को एक आधिकारिक विज्ञप्ति के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि मौजूदा 12 एकड़ औद्योगिक प्लॉट को ‘क्लस्टर लैंड यूटिलाइज़ेशन’ (CLU) के तहत वाणिज्यिक‑आवासीय मिश्रित रूप में परिवर्तित करने की प्रस्तावित योजना को अब आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

यह निर्णय कई सार्वजनिक परामर्शों और नियोजन निकायों की रिपोर्टों के बाद लिया गया, जिसमें मास्टर प्लान के मौजूदा प्रावधानों के उल्लंघन, पर्यावरणीय प्रभाव एवं मौजूदा औद्योगिक इकाइयों की कार्यशीलता को लेकर गंभीर चिंताएँ उजागर की गईं। UT विकास प्राधिकरण के प्रमुख ने बताया कि "औद्योगिक क्षेत्र को संरक्षित रखना, आर्थिक उत्पादन और रोजगार सुरक्षा को प्राथमिकता देना, तथा अनियोजित भूमि‑उपयोग परिवर्तनों से शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अनावश्यक दबाव पैदा न करना हमारी प्राथमिकता है।"

प्रस्तावित CLU परिवर्तन के समर्थकों में प्रमुख रियल एस्टेट डिवेलपर्स, कुछ विपक्षी राजनीतिक दल और स्थानीय निवासी समूह शामिल थे, जो इस भूमि को वाणिज्यिक‑आवासीय हब में बदल कर रोजगार के नए अवसर और शहर के विस्तार को तेज़ करने की आशा रखते थे। वहीं, प्रादेशिक औद्योगिक संघों ने इस फैसले की सराहना की, यह तर्क देते हुए कि मौजूदा विनिर्माण इकाइयाँ अंतरण‑कालीन आर्थिक दबावों से मुक्त होंगी।

निर्णय के बाद, UT प्रशासन ने तत्काल दो-स्तरीय समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी। पहले चरण में नियोजन विभाग ने मौजूदा ज़ोनिंग नियमों की वैधता की पुनः जांच की, जबकि दूसरे चरण में पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) की व्यापक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इन प्रक्रियाओं को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक किया गया है, जिससे नागरिकों को दस्तावेज़ों तक पहुँच और आगे की सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने का अवसर मिलेगा।

लाभ और हानि दोनों पक्षों पर इस निर्णय के असर स्पष्ट है। औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत 2,500 से अधिक कर्मियों को निकट भविष्य में अपने रोजगार में किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ेगा, जबकि संभावित वाणिज्यिक कर आय को अभी भी शहर को वैकल्पिक योजना के माध्यम से ही जनरेट करना पड़ेगा। वहीं, योजना के विरोधियों ने संकेत दिया कि इस बिंदु पर प्रशासन की निर्णय‑प्रक्रिया में ‘ब्यूरोक्रेसी की जड़ें गहरी हैं; समुचित सार्वजनिक मांग को सुनने के बजाय नियमों की कठोरता को प्राथमिकता दी गई है।’

उद्यमियों और नागरिक संगठनों ने इस घोषणा के बाद ‘विकास की गति बनाए रखें, लेकिन नियोजन में लचीलापन रखें’ का संदेश दिया। यह कह कर वे उम्मीद जताते हैं कि भविष्य में मिश्रित‑उपयोग परियोजनाओं को विकसित करने के लिए अधिक व्यापक और सामंजस्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाएगा, जिससे न केवल आर्थिक लाभ बल्कि सामाजिक संतुलन भी सुनिश्चित हो सके।

Published: May 5, 2026