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गोवा हाई कोर्ट ने नगरपालिका चुनाव अधिनियम पर विस्तृत प्रतिक्रियाओं की मांग की

गुजरात के कोंडे में स्थित हाई कोर्ट ने 5 मई 2026 को अपना निर्देश जारी किया, जिसमें गोवा राज्य सरकार द्वारा जारी किए गये नगरपालिका चुनाव अधिनियम पर सभी संबंधित पक्षों से लिखित प्रतिक्रिया देने की माँग की गई है। यह अधिनियम, जो पिछले महीने राज्य की विधायिका द्वारा तत्काल प्रभाव से लागू किया गया था, का उद्देश्य नगर निगम में आगामी चुनावों की समयसारिणी तथा प्रक्रियात्मक बदलावों को स्पष्ट करना था।

हालांकि, अधिनियम को लेकर कई मुद्दे उठे। प्रमुख राजनीतिक दलों ने कहा कि इस अधिनियम में चुनाव की तारीख को आगे‑पीछे करके जनता की सहभागिता को प्रभावित किया गया है, जबकि नगर निगमों की कार्यवाही में अनिश्चितता बढ़ी है। राज्य चुनाव आयोग ने भी संकेत दिया कि अधिनियम की वैधता पर सवाल उठाने के बाद, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि मौजूदा प्रशासनिक ढांचा बिना वैध निविशित प्रतिनिधियों के कार्य न करे।

हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद, गोवा सरकार ने कहा है कि वह आवश्यक दस्तावेज़ीकरण और तर्क प्रदान करने में सहयोग करेगी। इसी बीच, नागरिक संगठनों ने इस प्रक्रिया को “प्रशासनिक घड़ियाल” का उदाहरण बताया, क्योंकि अनुच्छेदों की उलझन से निवासियों को रोज़मर्रा की सेवाओं में बाधा का सामना करना पड़ रहा है।

राज्य सरकार की ओर से यह अधिनियम, जिसे अचानक लागू किया गया था, लंबे समय से स्थगित हुए नगरपालिका चुनावों को पुनः प्रारंभ करने के इरादे से आया था। लेकिन प्रायोजित दलों और नागरिक समाज ने इसे “विलंबक” कहा, जो मौजूदा प्रशासनिक अक्षम्यताओं को छिपाने का प्रयास है।

हाई कोर्ट ने पक्षकारों को दो हफ्ते की सीमा में अपने-अपने विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह प्रक्रिया आगे चलकर न्यायालय को यह तय करने में मदद करेगी कि अधिनियम को वैध माना जाए या इसे निरस्त किया जाए, जिससे गोवा के नगर निकायों को पुनः निर्वाचित प्रतिनिधियों के अधिकार मिल सकें। वर्तमान में, अधिकांश नागरिक प्रशासनिक अस्थिरता से निपटते हुए अपने स्थानीय सेवाओं के नियमित संचालन की आशा कर रहे हैं।

Published: May 6, 2026