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गोवा हाई कोर्ट ने गोवा फाउंडेशन की डंप माइनिंग नीति के विरुद्ध याचिका खारिज की
गोवा उच्च न्यायालय ने आज पर्यावरणीय गैर-सरकारी संस्था गोवा फाउंडेशन द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दी, जिसमें राज्य द्वारा अपनाई गई डंप माइनिंग नीति को विनियमित करने की मांग की गई थी। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि अभियोजक द्वारा प्रस्तुत तथ्य और तकनीकी आंकड़े मौजूदा नीति के वैधता को सिद्ध करने में पर्याप्त नहीं थे।
डंप माइनिंग नीति, जो 2023 में गोवा सरकार ने औद्योगिक कचरे को पुनः उपयोग योग्य खनिज के रूप में निकालने की अनुमति देने के लिए तैयार की थी, का उद्देश्य खनन क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना और आय के नए स्रोत खोलना बताया गया था। सरकार ने दावा किया कि यह कदम अनियमित खनन को नियंत्रित करने के साथ-साथ पर्यावरणीय झटके को कम करेगा।
दूसरी ओर, गोवा फाउंडेशन ने इस नीति को अंधाधुंध आर्थिक लाभ के लिये पर्यावरणीय नियमों के बलि बकरा बनाते हुए आलोचना की। उन्होंने कहा कि डंप माइनिंग से भू-स्थिरता, जल स्रोतों की गुणवत्ता और स्थानीय वनस्पति पर दीर्घकालिक नुकसान होगा। संस्थापक ने यह भी उजागर किया कि नीति में पर्याप्त सार्वजनिक परामर्श या स्थानीय समुदाय की भागीदारी नहीं की गई थी।
हाई कोर्ट ने अपनी रजिस्टर्ड टिप्पणी में कहा कि नीति तैयार करने में पारित प्रक्रियाओं का पालन हुआ है और पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) भी अधिदेशानुसार आयोजित किया गया था। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में नीति के कार्यान्वयन में वास्तविक पर्यावरणीय क्षति सिद्ध होती है, तो संबंधित पक्षों को पुनः चुनौती दे सकते हैं।
स्थिति को देखते हुए, गोवा के नगरपालिका प्रशासन पर सवाल उठ रहा है कि वह इस नई खनन नीति के स्थानीय प्रभाव को कैसे नियंत्रित करेगा। विशेष रूप से पर्यटक क्षेत्रों के निकट स्थित कस्बों में रह रहे नागरिकों को धूल, शोर और जल प्रदूषण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन को अब न केवल पर्यावरणीय निगरानी को सुदृढ़ करना होगा, बल्कि प्रभावित समुदायों को उचित प्रतिपूर्ति और पुनर्वास योजनाएँ भी प्रदान करनी होंगी।
राज्य के उद्योग विभाग के प्रवक्ता ने कहा, "डंप माइनिंग नीति आर्थिक विकास और पर्यावरणीय सुरक्षा दोनों को संतुलित करने का एक प्रयास है। हम सभी नियामक प्रावधानों का कड़ाई से पालन करेंगे और किसी भी अनपेक्षित क्षति पर त्वरित कार्रवाई करेंगे।"
यह फैसला गोवा में खनन नीति और पर्यावरण संरक्षण के बीच का संघर्ष फिर एक नई मोड़ पर ले गया है। जबकि न्यायालय ने वर्तमान में लाए गए नियामक ढाँचे को समर्थन दिया है, लेकिन सार्वजनिक हित की रक्षा के लिये सतत निगरानी और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग भी स्पष्ट रूप से सामने आती है।
Published: May 8, 2026