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Category: शहर

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गुड़गाँव के डीएलएफ फेज़ में निर्माणस्थलों पर पीने योग्य पानी के दुरुपयोग की जांच

गुड़गाँव नगर निगम ने आज सुबह डीएलएफ के प्रमुख फेज़‑1, 2 और 3 के निर्माण स्थलों में पीने योग्य जल (potable water) के अनधिकृत उपयोग की विस्तृत जांच शुरू की। यह कदम स्थानीय निवासियों की लगातार शिकायतों के बाद उठाया गया, जिनका कहना है कि जल टैंक अक्सर खाली रह जाते हैं, जबकि उन ही क्षेत्रों में कंक्रीट‑मिक्सिंग के लिये सार्वजनिक जल नेटवर्क से बड़ी मात्रा में पानी निकाला जा रहा है।

जांच का अधिकारिक तौर पर आदेश हरियाणा शहरी विकास एजेंसी (HUDA) और गुड़गाँव जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (GWSSB) को मिला है। टीम के सदस्य ने साइटों पर पोर्टेबल फ्लो‑मीटर और जल‑गुणवत्ता परीक्षण किट का प्रयोग कर यह पुष्टि की कि बहु‑स्तरीय जल पाइपलाइन से सीधे पानी ले जाकर इसे कंक्रीट, ईंट‑मोर्टार और अन्य निर्माण कार्य में प्रयोग किया जा रहा था। प्रारम्भिक डेटा के अनुसार, केवल पिछले दो हफ्तों में लगभग 1.3 लाख लीटर पीने योग्य जल इस उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया।

स्थानीय प्रशासन ने इस अनैतिक प्रथा को रोकने के लिये तीन प्रमुख कार्यवाही बतायी है:

निर्माण उद्योग में इस प्रकार की लापरवाही को अक्सर ‘जल‑कीमती’ शब्द के अनदेखे रूप में देखा जाता है। जबकि गुड़गाँव की जल‑आपूर्ति प्रणाली को पिछले दो वर्षों में 30% की कमी का सामना करना पड़ रहा है, तब भी कुछ ठेकेदार ऐसे उपाय अपनाते हैं जो जल‑संरक्षण को ‘डिज़ाइन‑फ़ेल्योर’ बना देते हैं। सूखा मौसम, बढ़ती जनसंख्या और तेज़ी से विकसित होते शहरी क्षेत्रों में जल‑नियोजन की अहमियत स्पष्ट है, परन्तु नीति‑निर्माता अक्सर नियम‑व्यवस्था को ‘उपलब्धता’ के नाम पर अनदेखा कर देते हैं।

शहर के कई निवासियों ने इस जांच को ‘समय से पहले आए सुधार’ कहा है, जबकि नगरपालिका को यह भी चेतावनी दी गई है कि आगे भी ऐसी अनदेखी न हो तो अतिरिक्त दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। अंत में, प्रशासन ने कहा कि जल‑संरक्षण के प्रति जागरूकता केवल नीतियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि भूमि‑उपयोग, निर्माण अनुबंध और कार्यशाला निरीक्षण में भी सख्ती लानी होगी।

Published: May 6, 2026