जो होना ही था, उसे दर्ज करता, देखता और सवाल करता समाचार मंच

Category: शहर

गुजरात में पॉपुलर बिल्डर्स के मालिक को भूमि धोखा मामले में जमानत नहीं मिली

राजभवन, अहमदाबाद – गुजरात के सूरत न्यायालय ने पॉपुलर बिल्डर्स के संस्थापक, श्याम सिद्धु (नाम परिवर्तन), को 23 अप्रैल को दायर भूमि जालसाज़ी मामले में जमानत से वंचित कर दिया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी ने विगत दो वर्षों में कई आवासीय परियोजनाओं के लिये नकली जमीन पट्टे, झूठे सर्वेक्षण रिपोर्ट और अनधिकृत राजस्व दस्तावेज तैयार करवाए थे, जिससे अनगिनत खरीदारों को आर्थिक नुकसान हुआ।

अवरोधित दस्तावेज़ों में ऐसी ज़मीनी जानकारी है जिसे कलंकरों ने सरकारी कार्यालयों में प्रस्तुत कर स्वीकृति प्राप्त की। अदालत ने इस बात को रेखांकित किया कि “कागज़ के टुकड़े से बनाए गए सपने, जब वास्तविकता से टकराते हैं, तो न्याय की चौकी पर सबको खड़ा होना पड़ता है।” जमानत न मिलने का अर्थ है कि आरोपी अब से जेल में रहेगा जब तक कि आगे के सुनवाई का समय नहीं निर्धारित हो जाता।

इस मामले ने स्थानीय प्रशासन की नियोजित भूमि वितरण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। गजब के भूमि‑रिकॉर्ड सब‑परिवर्तन को रोकने के लिये नगर विकास प्राधिकरण (एनडीए) और ज़िला रजिस्ट्री कार्यालयों की निगरानी में कमी सिद्ध हुई है। विशेष जाँच के बाद पता चला कि कई बार भूमि स्वामित्व की पुष्टि के लिये उपयोग किए जाने वाले “डिजिटल मैप” एक ही प्रोजेक्ट के लिये दो अलग‑अलग धारकों को दिखा रहे थे।

घर खरीदारों के संघों ने कहा कि वे अब भी अनुदान‑सहीत उधारी में फंस चुके हैं और रेसिडेंशियल बी-एंड‑सी प्लॉट्स के वैधता के लिये न्यायालय से स्पष्ट आदेश चाहते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि “बिना जमानती के खड़ी जामीन पर खड़ी होती है, लेकिन असली ज़मीन‑सुरक्षा को तोड़ने वाला कोई भी कुसंगत नहीं होना चाहिए।”

नगर निगम ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया है और कहा कि भविष्य में सभी भूमि‑संबंधी अनुमतियों को ब्लॉक‑चेन‑आधारित सत्यापन प्रणाली से जोड़ा जाएगा, ताकि दोहरी रिकॉर्डिंग और दस्तावेज़‑जालसाज़ी को रोका जा सके। राजनीतिक दलों ने भी इस अवसर का उपयोग कर सरकार की “परियोजना‑परिचालन” में सुधार की माँग की है।

वर्तमान में मामले की सुनवाई जारी है और आगे के चरण में पुलिस द्वारा पेश किए जाने वाले विस्तृत फॉरेंसिक रिपोर्ट तथा गवाहों के बयान के आधार पर न्यायिक निर्णय लिया जाएगा। इस बीच, कई गृहस्वामी अपेक्षा कर रहे हैं कि न्याय की डोर के साथ-साथ एक पारदर्शी भूमि‑प्रबंधन प्रणाली भी स्थापित हो, जिससे भविष्य में इस प्रकार के “कागज़ी परीक्षेत्र” को सख़्ती से रोकने की संभावना बढ़े।

Published: May 6, 2026