गुजरात में अस्पताल बिलों की महंगाई, शहरी रोगी खर्चें 51,700 रुपये प्रति भर्ती
राष्ट्रीय स्वास्थ्य खर्च सर्वेक्षण के अनुसार, गुजरात राज्य अब अस्पताल बिलों के उच्च स्तर पर पाँचवें स्थान पर आया है। सर्वेक्षण में शहरी रोगियों का औसत खर्च 51,700 रुपये प्रति भर्ती बताया गया, जो कई अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। यह आंकड़ा न केवल रोगियों की आर्थिक स्थिरता को चुनौती देता है, बल्कि नगर प्रशासन की स्वास्थ्य‑सेवा नीतियों पर भी प्रश्न उठाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात के प्रमुख शहरी केंद्रों – अहमदाबाद, वड़ोदरा और सूरत – में निजी स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या में तीव्र वृद्धि हुई है। निजी अस्पतालों द्वारा उच्च स्तर की सुविधा और विशेषज्ञता प्रदान करने के बदले में इलाज के शुल्क पर कोई नियामक प्रतिबंध नहीं है, जिससे रोगी अक्सर बिना गरिमा के महँगे बिल का बोझ उठाते हैं।
नगर पालिकाओं के पास सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने के बावजूद, बजट आवंटन में कमी और पुरानी बुनियादी ढांचा इस वृद्धि को रोक नहीं पाया। कई शहरों में सार्वजनिक अस्पतालों की बिस्तर क्षमता 70 % से अधिक भर चुकी है, जबकि निजी अस्पतालों की कीमतें 1.5 गुना तक बढ़ा दी गई हैं। इस स्थिति में कम‑आय वर्ग के नागरिक भी निजी संस्थानों को कबूल करने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे उच्च चिकित्सा ऋण, बचत में कटौती और जीवन स्तर में गिरावट जैसी सामाजिक समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया अभी तक स्पष्ट नहीं है। नगरपालिका सीमावर्ती स्तर पर कुछ किरायेदार योजनाएँ चलाने की घोषणा की है, लेकिन इन योजनाओं का कवरेज सीमित है और लाभार्थी चयन में पारदर्शिता की कमी देखी जा रही है। साथ ही, स्वास्थ्य बीमा कवरेज के प्रसार में भी ठहराव है, जिससे अधिकांश शहरी परिवारों को स्वयं खर्च उठाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का तर्क है कि लागत नियंत्रण के लिए दो मुख्य कदम आवश्यक हैं: पहली, निजी अस्पतालों के शुल्क पर नियामक सीमाएँ लगाना और रोगी अधिकारों के प्रवर्तन के लिए एक स्वतंत्र निगरानी निकाय स्थापित करना; दूसरी, सार्वजनिक स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर को तेज़ी से मजबूत करना, ताकि लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण देखभाल उपलब्ध हो सके। यदि नगर प्रशासन इन उपायों को शीघ्रता से लागू नहीं करता, तो अगले कुछ वर्षों में महंगाई का प्रभाव स्वास्थ्य जनसांख्यिकी पर गहरा पड़ेगा।
Published: May 4, 2026