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Category: शहर

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गुजरात में DDCET में 20,893 छात्रों ने परीक्षा दी, नगर प्रशासन की तैयारियों पर सवाल उठे

गुजरात राज्य में डिप्लोमा‑टू‑डिग्री कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (DDCET) 2026 में कुल 20,893 अभ्यर्थियों ने लिखी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5% अधिक है। परीक्षा क्रमिक रूप से 35 जिलों में स्थापित 120 केंद्रों पर आयोजित हुई, जिनमें अधिकांश नगर निगमों की जिम्मेदारी थी।

केंद्रीय प्रमुखता से बहस का विषय इन केन्द्रों की बुनियादी सुविधाओं की कमी रहा। कई शहरों ने बताया कि पीएसयू‑प्रायोजित बिजली आपूर्ति के बार‑बार विफल होने के कारण परीक्षा हॉल में लाइटिंग असमान हो गई, जबकि ऑफ‑स्ट्रीट लाइटिंग की व्यवस्था भी उचित नहीं थी। ऐसी परिस्थितियों में छात्रों को अतिरिक्त प्रकाश के लिए मोबाइल फ़्लैशलाइट का उपयोग करना पड़ा—एक ऐसी सुविधा जो आम तौर पर नगर विकास योजना में नहीं होती।

परिवहन की भी समस्या विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में उभरी। कुछ नगर परिषदों ने परीक्षा दिन के लिये विशेष बसें चलाने की घोषणा की, परन्तु वास्तविकता यह रही कि कई वैधानिक रूट पर भी बसों की संख्यात्मक कमी रही, जिससे अभ्यर्थियों को भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक वाहनों में सफ़र करना पड़ा। ट्रैफ़िक प्रबंधन के लिए स्थानिक पुलिस की उपस्थिति सीमित रही; कई जगहों पर भीड़ नियंत्रण के लिये केवल छोटे पैमाने पर पुलिस कुर्सी और फुटपाथ पर सीमित नज़र रखने वाले अधिकारी ही उपलब्ध थे।

डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी अंतर स्पष्ट था। कुछ शहरों ने कंप्यूटर‑आधारित एड्मिशन पोर्टल के लिये स्थायी वाई‑फ़ाइ‑हॉस्पिटैलिटी की ओर इशारा किया, परन्तु वास्तविकता यह थी कि परीक्षा हॉल में नेटवर्क कनेक्टिविटी अक्सर ‘ड्रॉप’ हो जाती थी, जिससे ऑनलाइन पेपर‑ड्राफ्ट और उत्तर जांच में बाधाएँ उत्पन्न हुईं। निचली बजट श्रेणी के शहरी क्षेत्रों में यह समस्या अधिक बार सामने आई, जिससे यह प्रश्न उठता है कि क्या ‘डिजिटल शासन’ का नारा मात्र शब्दकौशल बन कर रह गया है।

शहर प्रशासन के प्रतिनिधियों ने कहा कि सभी केंद्रों को मानक के अनुरूप बनाने के प्रयास चल रहे हैं, परन्तु बजट प्रतिबंध, अनुबंधीय देरी और पुरानी इंफ़्रास्ट्रक्चर के कारण कार्यवाही अक्सर टाल‑मटोल में बदल जाती है। इस बीच, छात्रों ने कहा कि उन्होंने परीक्षा के दौरान अनिश्चितता का सामना किया, जो उनके भविष्य की योजना में अनचाहा तनाव जोड़ता है।

समिक्षकों का मानना है कि परीक्षा‑सुविधाओं की असमानता न केवल शैक्षणिक अवसरों को प्रभावित करती है, बल्कि शहरी प्रशासन की क्षमता को भी प्रश्नवाचक बनाती है। आगे बढ़ते हुए, यह आवश्यक है कि नगर निगमें सायन्य‑डिज़ाइन वाले परीक्षा केंद्रों की योजना को प्राथमिकता दें, जिसमें स्थायी शक्ति आपूर्ति, उचित ट्रैफ़िक प्रबंधन, शीघ्र उत्तरदायी पुलिस व्यवस्था और विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी शामिल हो। केवल तभी DDCET जैसे बड़े पैमाने के शैक्षणिक कार्यक्रम शहर की विकासवादी प्रतिबद्धता को सच्चाई में बदल पाएंगे।

Published: May 6, 2026