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गुजरात ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में राजस्थान को पीछे छोड़ा, भारत में प्रथम स्थान हासिल

राज्य ऊर्जा प्राधिकरण के नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, गुजरात ने अपने कुल नवीकरणीय ऊर्जा स्थापित क्षमता में 30.8 गिगावॉट का मुक़ाबला कर 31.2 गिगावॉट पहुँचा, जिससे वह राजस्थान के 30.9 गिगावॉट को पीछे छोड़ते हुए भारत का अग्रणी बन गया। इस उपलब्धि को गुजरात की पंचांग योजना और पवन‑सौर मिश्रित परियोजनाओं के तेज़ी से कार्यान्वयन के साथ जोड़ा जा रहा है।

गुजरात सरकार ने पिछले पाँच वर्षों में सौर ऊर्जा के लिए 12 सोलर पार्क, पवन ऊर्जा के लिए 8 बड़े पवन क्षेत्र स्थापित किए, तथा विशेषीकृत ग्रिड इंटरकनेक्शन हब के माध्यम से जलविद्युत, बायो‑गैस जैसी विविधता को एकीकृत किया। ये पहलें, कच्चे आंकड़ों में नज़र आए, लेकिन गहराई से देखिये तो कई प्रशासनिक अनियमितताओं की छाया भी मिलती है। उदाहरण के तौर पर, सौर पार्क के लिए ज़मीन अधिग्रहण में स्थानीय अभियानों को सीमित करने के लिये ‘स्मार्ट लेज़र सर्वे’ के आधार पर अचानक सीमाएँ बदलनी पड़ीं, जिससे कुछ किसान समूहों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।

नागरिक लाभों की बात की जाए तो ऊर्जा लागत में 12 % तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे औद्योगिक उत्पादन में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी है। साथ ही, रिन्यूएबल ऊर्जा क्षेत्र में 75,000 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। परन्तु इस सकारात्मक चित्र के साथ ही सामाजिक असंतुलन भी उभरा है: छोटे‑पैमाने के सौर मेटरिंग स्थापित करने की प्रक्रिया में देर‑से‑दरजों की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण कई स्थानीय गृहस्वामी अभी भी उच्च बिजली बिल का सामना कर रहे हैं।

वित्तीय दृष्टि से, गुजरात ने केंद्र सरकार के ‘हरी ऊर्जा प्रोत्साहन निधि’ से 4.5 बिलियन रुपये की सहायता ली, और राज्य‑स्तरीय ‘सस्टेनेबिलिटी फंड’ के तहत 2 बिलियन रुपये के अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान की। यह आंकड़ा प्रशासकीय क्षमता की सराहना करता है, परन्तु उन अभियानों में कार्रवाई की गति को लेकर आलोचनात्मक आवाज़ें भी बनी हुई हैं। विशेष रूप से, नवीनतम ग्रिड अपग्रेड के लिए आवश्यक 1.2 बिलियन रुपये के निवेश को दो साल तक टाल दिया गया, जिससे कई पवन टरबाइन की ऊर्जा आउटपुट में क्षति हुई।

भविष्य की राह स्पष्ट है—जैसे ही गुजरात नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में 35 गिगावॉट को लक्ष्य कर रहा है, वहीँ जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिये साप्ताहिक निगरानी और स्थानीय सहभागिता को मजबूत करना अनिवार्य है। वर्तमान में, राज्य प्रशासन की ‘ऊर्जा पारदर्शिता पोर्टल’ के माध्यम से डेटा उपलब्ध कराना सराहनीय है, परन्तु उसे अधिक उपयोगकर्ता‑मैत्री बनाकर नागरिकों को वास्तविक‑समय में अपने बिल और उत्पादन आँकड़े देखने देना आवश्यक है। तभी इस ‘साखर‑प्यारी’ उपलब्धि को सतत विकास की दिशा में सच्चा मोड़ मिल पाएगा।

Published: May 6, 2026