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गुजरात के डेटा‑सेंटर योजना: सौर ऊर्जा‑संचालित सर्वर फार्मों पर बड़ा दांव

राज्य सरकार ने पिछले महीने सौर‑ऊर्जा‑आधारित डेटा‑सेंटर का पहला चरण शुरू किया, जिसमें 150 मेगावॉट क्षमता वाले सोलर फार्म को सीधे सर्वर पार्कों को बिजली आपूर्ति करने के लिए नियोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य भारत के उदयशील क्लाउड‑इन्फ्रास्ट्रक्चर को स्थायी ऊर्जा स्रोतों से जोड़ना और अंतरराष्ट्रीय टेक‑जायंट्स को निवेश के लिये आकर्षित करना है।

गुजरात ने 2024‑2026 के बीच 5,000 एकड़ की वैध भूमि को डेटा‑सेंटर क्लस्टर के रूप में निर्धारित किया, जिसमें राज्य द्वारा 70 प्रतिशत तक की जमीन‑भुगतान, 100 प्रतिशत विद्युत‑कर में छूट और तेज़ मंजूरी प्रक्रिया का वचन दिया गया। एपीजी सेंटर, टेस्ला क्लाउड और कई भारतीय स्टार्ट‑अप्स ने इन नीतियों के कारण पहले ही पार्टनरशिप की पुष्टि कर ली है।

प्रशासनिक रूप से, उद्योग‑ब्यूरो ने विशेष ‘डेटा‑सेंटर नियामक बोर्ड’ का गठन किया, जो हर परियोजना की पर्यावरणीय, जल‑उपयोग और सामाजिक प्रभाव की समीक्षा करेगा। हालांकि, बोर्ड की सख्ती को लेकर स्थानीय NGOs ने निराशा व्यक्त की है, क्योंकि कई बार ऐसे बोर्ड मौजूदा नियमों को केवल औपचारिक रूप से मानते हैं, जबकि वास्तविक निगरानी में कमी रह जाती है।

स्थानीय नागरिकों पर प्रभाव दोधारी तलवार जैसा है। एक ओर, डेटा‑सेंटरों से रोजगार के अवसर, विशेषकर आईटी‑परीक्षण, रख‑रखाव और ग्रिड‑मैनेजमेंट में बढ़ेंगे, जिससे छोटे शहरों की आय में संभावित वृद्धि होगी। दूसरी ओर, सौर‑फार्मों के लिए बड़े पैमाने पर जल का उपयोग और भूमि अधिग्रहण के मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। कुछ गाँवों में जमीन का तेज़ी से अधिग्रहण होने से प्रतिरोधी विराम देखे जा रहे हैं, जो भविष्य में बीजक का मुक़ाबला कर सकते हैं।

बुनियादी ढाँचे की बात करें तो, बिजली ग्रिड को सोलर‑पावर के साथ सिंक्रोनाइज़ करने के लिए नई ट्रांसफ़ॉर्मर स्टेशन और हाई‑वोल्टेज लाइनें स्थापित की जा रही हैं। परंतु, विशेषज्ञों का मानना है कि इन नई लाइनों की स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिये अतिरिक्त बैक‑अप सिस्टम और लोड‑शेडिंग प्रोटोकॉल की ज़रूरत होगी, नहीं तो बिखरे हुए सोलर‑इंटेंसिटी वाले क्षेत्रों में ऊर्जा‑घटने की संभावना बनी रहेगी।

समग्र रूप में, गुजरात का डेटा‑सेंटर बिंदु एक साहसिक आर्थिक प्रयोग है, जिसमें विज़न और व्यावहारिक चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है। यदि राज्य इस परियोजना के पर्यावरणीय व सामाजिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से संभाल सकता है, तो यह न केवल राज्य की डिजिटल ताकत को बढ़ाएगा, बल्कि भारत के हरित‑डेटा‑इकोसिस्टम के निर्माण में एक मॉडल भी स्थापित कर सकता है।

Published: May 4, 2026