किसान सहकारी समितियों में ऋण सीमा बढ़ाने का आग्रह, प्रशासन की धीमी गति
आंदोलन के रूप में आयोजित एक किसान फोरम ने पिछले सप्ताह राजधानी के निकट स्थित कई सहकारी समितियों में ऋण सीमा बढ़ाने की स्पष्ट माँग पेश की। फोरम के प्रतिनिधि, जो मुख्यतः धान, गन्ना और जलगेंहू के उगाने वाले छोटे-औसत किसानों का समूह है, उन्होंने कहा कि मौजूदा सीमा 3 लाख रुपये प्रति सदस्य पर स्थिर रह गई है, जबकि इनपुट लागत में 30 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि देखी जा रही है।
फोरम के प्रवक्ता ने बताया कि कई किसान मौसमी कर्जों के कारण खर्चों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उत्पादन में गिरावट और बाजार में कीमतों में अस्थिरता उत्पन्न हो रही है। उन्होंने अतिरिक्त क्रेडिट की मांग को न केवल आर्थिक राहत के रूप में, बल्कि ग्रामीण वित्तीय स्वावलंबन के रणनीतिक कदम के रूप में पेश किया।
इन मांगों पर जिला कृषि विभाग ने एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि "वर्तमान ऋण मानदंडों का पुनः मूल्यांकन किया जा रहा है और प्रार्थना की गई सीमा में समुचित संशोधन संभव हो तो किया जाएगा।" हालांकि, इस बयान में ठोस समय-सारिणी या विशिष्ट प्रक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे किसानों में निराशा की लहर तेज़ हो गई।
शहर के नगरपालिका अधिकारी भी इस चर्चा का हिस्सा बने, क्योंकि कई सहकारी समितियों के कार्यालय मुख्य रूप से नगरपालिका क्षेत्र के भीतर स्थित हैं। नगर निगम के एक प्रतिनिधि ने ऐतिहासिक तौर पर ग्रामीण वित्तीय उत्पादों में साझेदारी के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा, "हमारा प्राथमिक कर्तव्य बुनियादी सेवाएँ प्रदान करना है, परंतु वित्तीय सशक्तिकरण के मुद्दे पर हम राज्य स्तर के साथ तालमेल बनाए रखने का प्रयास करेंगे।" यह टिप्पणी सूक्ष्म रूप से इस बात का संकेत देती है कि स्थानीय प्रशासन अपनी प्राथमिकताओं को बुनियादी ढाँचे तक सीमित रखता है, जबकि किसानों के वास्तविक संकट को सुलझाने में देर करने की प्रवृत्ति बरकरार है।
पुलिस विभाग ने भी फोरम के दौरान कोई सार्वजनिक शांति भंग नहीं होने पर शांति पत्र जारी किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह मांगात्मक आंदोलन शान्तिपूर्ण रूप से चल रहा है। फिर भी, स्थानीय समाचार एजेंसियों ने रिपोर्ट किया कि कई किसान इस बात से असंतुष्ट हैं कि उनकी आवाज़ें केवल शब्दों तक सीमित रह गई हैं, जबकि व्यावहारिक उपायों में विलंब हो रहा है।
समुचित समाधान के लिए विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सहकारी समितियों को ऋण सीमा पर पुनर्विचार के साथ साथ, जोखिम प्रबंधन के लिए बीमा योजनाओं और डिजिटल ऋण प्रोसेसिंग को तेज़ करने की जरूरत है। अन्यथा, मौजूदा प्रणाली में सुधार की गति धीमी बनी रहेगी, और किसानों को उधारी का झंझट गंभीर आर्थिक बोझ में बदल सकता है।
Published: May 6, 2026