कौशांबी में मिट्टी के टीले के धँसे से तीन की मौत, प्रशासन पर सवाल
उत्तरी भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के कौशांबी ज़िल्हे में मंगलवार दोपहर जब दो गृहिणियों ने अपने बगीचे के लिये मिट्टी का टीला खोलने का काम शुरू किया, तो वह अचानक ढह गया। इस दुर्घटना में एक मातृ-धन्य परिवार की महिला, उसकी 8 साल की बेटी और एक पुरुष की आँखों के सामने सांसें रही। दो अन्य लोगों को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें तुरंत जिला अस्पताल में भर्ती किया गया।
पुलिस ने घटना स्थल पर फोरेंसिक जांच आरंभ की और मलबे के कारणों की पड़ताल के लिये सभी संबंधित व्यक्तियों से बयान ले रहे हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, टीले का निर्माण अनधिकृत निजी खनन के तहत किया गया था, जिसके लिये न तो नगर परिषद ने कोई अनुमति जारी की थी और न ही कोई सुरक्षा उपाय अपनाए गए थे।
कौशांबी नगर निगम ने यह बतलाते हुए कहा कि इस तरह के अनियमित खुदाई कार्यों को रोकने के लिये नियमित निरीक्षण कार्यक्रम चलाया जाता है, पर ‘जमीनी वास्तविकता’ में यह कार्यक्रम अक्सर ‘पाने की तरह’ ही रह जाता है। अधिकारी ने कहा, “हम भविष्य में ऐसे खतरनाक खुदाई को रोकने के लिये हर पक्की सड़कों के किनारे ‘नियंत्रण बिंदु’ स्थापित करेंगे, पर इस तरह की त्रासदी से हमें सच्ची फुसफुसाहट मिल रही है कि निगरानी कितनी कमजोर है।”
स्थानीय परिधानकर्ताओं और किसान वर्ग ने भी इस घटना पर “भूमि‑उपयोग नीति की लापरवाही” का आरोप लगाया। कई सामाजिक कार्यकर्ता इस बात को उजागर कर रहे हैं कि कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में ‘आवश्यकता’ के नाव पर अनधिकृत खुदाई की अनुमति मिल जाती है, जबकि सुरक्षा मानकों की कोई जाँच नहीं होती।
दुर्भाग्यवश, इस घटना से केवल तीन ही नहीं, बल्कि कई परिवारों की आजीविका पर भी प्रश्नचिन्ह लगा है। मृतकों के परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता की माँग की जा रही है, जबकि प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट और भविष्य की रोकथाम उपायों की अपेक्षा है।
एक दिशा‑निर्देश के तहत, जिला परिषद ने अगले सोमवार तक कार्यस्थल सुरक्षा प्रोटोकॉल और वैध खुदाई परमिट प्रक्रिया पर एक कार्यशाला आयोजित करने का नियोजन किया है। इस बीच, मलबा हटाने और बचाव कार्य के लिये जिला प्रशासन ने विशेष इकाइयों को तैनात किया है, जिससे मौजूदा जमीनी जोखिम को कम किया जा सके।
Published: May 3, 2026