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कोलकाता हवाई अड्डे के पास चंद्रनाथ राठ की व्यवस्थित हत्या, सुरक्षा व्यवस्था में स्पष्ट चूक
कोलकाता के शांति से लिपटे दक्षिण भाग में आज सुबह एक गोलीबारी हुई, जिसमें बीजेपी नेता सुबेंदु अधिकारी के समीप सहयोगी चंद्रनाथ राठ की मौत हो गई। घटनास्थल पर मिली स्कॉर्पियो, जिसमें कई गोलियों के छिद्र और खून से सने बैठने की जगहें थीं, से स्पष्ट होता है कि यह एक व्यवस्थित ठेका हत्यावली थी।
राठ के साथ चल रहे चालक को भी गंभीर चोटें आईं, जबकि अजनबी अँधेरे में निकल‑पड़ गए। स्थानीय स्तर पर पुलिस ने तुरंत नियंत्रण स्थापित किया, लेकिन कई नागरिकों ने बताया कि जिस सड़कों पर अपराध हुआ, वह पहले ही कई दुर्घटनाओं के कारण ‘खराब’ के रूप में चिन्हित थी। इस बात को देखते हुए यह प्रश्न उठता है कि पुलिस गश्त, सीसीटीवी कवरेज और ट्रैफिक नियोजन में कितनी वास्तविकता पर काम कर रहा है।
अधिकारी दल ने कहा कि मामले की जाँच के हिस्से के रूप में सीसीटीवी फुटेज को जल्द‑से‑जल्द स्कैन किया जा रहा है। हालांकि, यह उल्लेख करने लायक है कि पिछले कई महीनों में कोलकाता के कई प्रमुख चौकियों पर कैमरों की कार्यवाही में अक्सर ‘टेक्निकल गड़बड़ी’ का सामना करना पड़ा है। अगर यही तकनीकी अड़चनें नहीं हों, तो संभव है कि हम अभी तक अति‑सटीक हथियारों और गोंगटाचयी गोलीबारी के पर्दे के पीछे छुपे हुए असली कुख्यात प्रतिद्वंदियों की पहचान कर पाते।
इस घटना ने शहर के सुरक्षा ढाँचे में मौजूदा खामियों को उजागर किया है। कई नागरिकों ने कहा, “रास्ते पर जमे हुए ट्रैफिक लाइट, अनियमित पार्किंग और सड़कों का अनुपयुक्त नियोजन, यह सब मिलकर अपराधियों को सुविधाजनक मंच प्रदान करता है।” यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि सुरक्षा की मौलिक व्यवस्था में ‘कुर्सी पर बैठा समय’ का अभाव है, जबकि जनता को ‘कुर्सी पर बैठी उचित सुरक्षा’ की अपेक्षा है।
पुलिस ने आश्वासन दिया है कि अपराधियों को पकड़ने के लिए विशेष टास्क‑फ़ोर्स बनाया गया है और अपराधियों के उपयोग किए गए आधुनिक हथियारों की जाँच भी की जाएगी। अभी तक कोई आशय या संगठित समूह का दावा नहीं किया गया है, पर यही बात अपराधी नेटवर्क को और भी अधिक स्पष्ट रूप से सामने ले आएगी।
राजनीतिक आंकड़े, सुरक्षा एजेंट और आम नागरिक इस बात पर एकमत दिख रहे हैं कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए न केवल तेज़ जाँच, बल्कि शहरी नियोजन, ट्रैफ़िक प्रबंधन और सतत सुरक्षा निगरानी का पुनर्संरचनात्मक कदम आवश्यक है। जैसे शहर की सड़कों पर ‘ट्रैफिक बकाबक’ का मानदंड बना रहता है, वैसे ही सुरक्षा के मानक भी ‘ऐसा ही’ नहीं रह सकते।
Published: May 7, 2026