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Category: शहर

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कोलकाता में 8 साल पुरानी फ्लैट नहीं मिली, बिल्डर पर 1.7 लाख का जुर्माना

कोलकाता महानगरपालिका ने आज एक स्थानीय बिल्डर को 1.7 लाख रुपये का जुर्माना आकारते हुए कहा कि वह 2018 में बुक की गई आवासीय इकाई का कब्ज़ा अभी तक नहीं दे रहा है। खरीदार ने 2018 के मध्य में एक आधे-अधूरे प्रोजेक्ट के तहत फ्लैट बुक किया, लेकिन अब तक कोई आवंटन‑पत्र या स्वामित्व दस्तावेज़ नहीं मिला है।

विकास प्राधिकरण की शिकायत पर क़रार‑क़ानून के तहत कार्रवाई शुरू हुई। नगरपालिका के क़ानूनी विभाग ने बिल्डर को दो महीने के भीतर फ्लैट की डिलिवरी करने का अंतिम निर्देश दिया, नहीं तो निर्धारित जुर्माना लागू होगा। बिल्डर ने इस निर्देश को अनदेखा कर दिया, जिससे मौजूदा विवाद का स्तर बढ़ा।

खरीदार, जो इस समय किराए पर रहने के साथ-साथ इस उम्मीद में था कि नया घर जल्द ही हाथ लगेगा, ने बताया कि इस देरी ने उन्हें आर्थिक और सामाजिक दोनों ही नुकसान पहुँचाए हैं। कई परिवारों ने इस देरी के कारण वैकल्पिक आवास व्यवस्था में अतिरिक्त खर्च किया, जबकि निवेशित राशि पर ब्याज नहीं मिल रहा है।

नगर निगम के प्रमुख ने कहा, “रियल एस्टेट सेक्टर में नियामक ढाँचा कड़ा होना चाहिए। ऐसे मामलों में प्रोजेक्ट की समयबद्ध पूर्ति न होने पर जुर्माना लागू करना प्रशासन की जिम्मेदारी है, ताकि भविष्य में बिल्डरों को घुमा‑फ़िरा न करना पड़े।”

बिल्डर की ओर से अभी तक कोई समुचित जवाब नहीं मिला है। अभियोग पक्ष ने बताया कि यदि बिल्डर नियत अवधि में संपत्ति नहीं सौंपता, तो अतिरिक्त दण्ड और संभावित देनदारी के साथ-साथ अदालत में उपभोक्ता अधिकारों के तहत मुकदमा दायर किया जा सकता है।

स्थानीय गृहस्वामी समाज ने इस निर्णय का स्वागत किया, पर साथ ही कहा कि निरंतर निगरानी और तेज़ कार्यवाही के बिना ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकना मुश्किल है। इस घटना ने नगर विकास के नियामक तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को फिर से उजागर किया।

Published: May 6, 2026