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कोलकाता के DCP की अनुत्तरदायी अनुपस्थिति पर ED ने जारी किया लुक‑आउट सर्कुलर

कोलकाता—वित्तीय अपराधों की जांच करने वाला प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कल शहर के डिप्टी कमिश्नर (DCP) की अनुपस्थिति को लेकर एक लुक‑आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया। यह कदम उस मामले में लिया गया है जहाँ हाई‑रैंकिंग पुलिस अधिकारी को अंतिम बार दो हफ्ते पहले आधिकारिक कार्य से गायब माना गया था।

ED ने बताया कि लापता अधिकारी को संभावित आर्थिक धोखाधड़ी एवं धन शोधन के मामलों में साक्षी के रूप में बुलाया गया था। लुक‑आउट सर्कुलर से उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वह विदेश नहीं भागे और आगे की पूछताछ में उपलब्ध रहे।

पोलिस विभाग ने अभी तक इस कदम पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की, जबकि शहर की महापौर कार्यालय से कहा गया कि अनुपस्थिति के कारण विभागीय कार्यों में कोई व्यवधान नहीं आया है और सभी प्रबंधात्मक उपाय तुरंत लागू किए जा चुके हैं।

किए गए इस कदम से प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठते हैं। एक ओर जहाँ राष्ट्रीय एंटी‑मनी लॉन्ड्रिंग एजेंसी द्वारा कार्यवाही तेज़ी से की जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय पुलिस नेतृत्व की अनुत्तरदायी स्थिति से जनता के भरोसे में दरार पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में शारीरिक उपस्थिती न केवल जांच को बल्कि सार्वजनिक शांति एवं प्रशासनिक पारदर्शिता को भी प्रभावित करती है।

वेस्ट बंगाल के राज्य सरकार ने इस पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की तत्परता को सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष समिति गठन की घोषणा की है। इसमें जांच के क्रम में होने वाली किसी भी अनियमितता को रोकने और भविष्य में ऐसी स्थितियों को टालने के लिए प्रोटोकॉल को पुनः परिभाषित करने का प्रस्ताव है।

जब तक लापता DCP का पता नहीं चल पाता, शहर के नागरिक सेवा केंद्रों और पुलिस कार्यशालाओं में संचालन सामान्य रूप से चलता रहेगा। लेकिन इस मामले ने यह स्पष्ट किया कि उच्च पदस्थ अधिकारी भी प्रशासनिक निरीक्षण और वित्तीय नियामकों के दायरे में नहीं रह पाते, जब वे अपनी ज़िम्मेदारियों से दूर होते हैं।

Published: May 6, 2026