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कैलोल और लुनावड़ा तालुका में तेज़ बारिश और ओले ने उत्पन्न किया गंभीर व्यवधान
राजस्थान के निकटस्थ गुजरात के कैलोल और लुनावड़ा तालुकों में 6 मई की रात से शुरू हुई अचानक हुई बरसात में गंभीर गिरावट और ओले की गिरावट देखी गई। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में कैलोल में 78 मिलीलीटर वार्षिक औसत से दो गुना अधिक और लुनावड़ा में 65 मिलीलीटर का आँकड़ा दर्ज किया गया। ओले की तीव्रता ने कई ग्रामीण घरों की छतों को नुकसान पहुँचाया, जबकि शहरी क्षेत्रों में जलभराव की शिकायतें दर्ज की गईं।
स्थानीय प्रशासन ने आपातकालीन जल निकासी कार्य के लिए शहर स्तर पर 12 अतिरिक्त टैंकर्स और 8 पंपिंग स्टेशन तैनात किए। जल निकासी के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में जिला परिषद द्वारा दो दिन पहले जारी “वर्षा‑प्रबंधन योजना” को फिर से सक्रिय किया गया। हालांकि, कई नजदीकी कॉल सेंटर की रिपोर्टों में यह नोट किया गया कि टैंकरों के दौरे अक्सर देर से होते हैं, जिससे पूरे दिन जल जमाव का प्रभाव बना रहता है।
विजली विभाग ने बताया कि ओले की वजह से पोस्ट‑फॉल्ट डिस्ट्रिब्यूशन बॉक्स में शॉर्ट‑सर्किट हो गया, जिससे 3,400 घरों में बिजली कटौती हुई। विभाग ने आपातकालीन जनरेटर उपलब्ध कराए, परन्तु ग्रामीण इलाकों में प्रतिस्थापन कार्य में दो‑तीन घंटे अतिरिक्त समय लग रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने बुनियादी सुविधाओं की लापरवाही पर सवाल उठाए। सामाजिक मीडिया पर “बारिश की तैयारी में ‘ड्रॉइंग बनाते रहिए, काम नहीं’” जैसे व्यंग्यात्मक टिप्पणी मिलती हैं, जो संकेत देती हैं कि पिछले कई वर्षों में मौसमी बाढ़ प्रबंधन के दावे वास्तविक कार्यवाही में कम पढ़ते रहे हैं।
पॉलिसी‑निर्माताओं ने कहा कि इस आपदा ने “तत्कालिकता के दौरान प्रशासनिक तंत्र की जाँच‑पड़ताल” की आवश्यकता को उजागर किया है। आगामी कार्यवाही में जल निकासी के लिये बेहतर GIS‑मैपिंग और ओले‑सुरक्षित बुनियादी ढांचे के लिए बजट आवंटन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इन घटनाओं के बाद, जिला परिषद ने अगले हफ्ते एक सार्वजनिक सुनवाई का आयोजन किया है, जिसमें प्रभावित नागरिकों को सीधे प्रशासनिक प्रतिनिधियों के सामने अपने मुद्दे रखने का अवसर मिलेगा। समुचित समाधान की आशा के साथ, नागरिक अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में हुए इस व्यवधान की शीघ्र सुधार की मांग कर रहे हैं।
Published: May 7, 2026